हिसार में सैन सभा का बड़ा निर्णय, अब 10वीं पास व्यक्ति ही बन सकेगा प्रधान

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हिसार , 11 मई 2026 । हरियाणा के हिसार में जिला में आयोजित सैन समाज की महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। सभा में तय किया गया कि अब संगठन या समाज का प्रधान बनने के लिए उम्मीदवार का कम से कम 10वीं पास होना अनिवार्य होगा। इस निर्णय को समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने और नेतृत्व की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सभा के संरक्षक डॉ. राजकुमार दिनोदिया ने बताया कि यह फैसला हरियाणा में पंचायती राज चुनावों में लागू शैक्षणिक योग्यता की तर्ज पर लिया गया है। उनका कहना है कि डिजिटल और आधुनिक दौर में समाज के नेतृत्वकर्ताओं का शिक्षित होना जरूरी है, ताकि वे सरकारी योजनाओं, बजट प्रबंधन और डिजिटल कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझ सकें। हालांकि सदस्य या वोटर बनने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होगी। सलाहकार और शोभित पदों पर कम पढ़े-लिखे लोगों को भी जिम्मेदारी दी जा सकेगी।

सैन सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि बदलते समय में सामाजिक संगठनों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए शिक्षित नेतृत्व बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि पढ़ा-लिखा प्रतिनिधि समाज के मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकेगा और सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा आधुनिक तकनीक का लाभ समाज तक पहुंचाने में अधिक सक्षम होगा। इसी सोच के तहत यह नया नियम लागू करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में समाज के कई वरिष्ठ सदस्य, युवा प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे। निर्णय के दौरान शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और युवाओं की भागीदारी पर विशेष चर्चा हुई। कई वक्ताओं ने कहा कि समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है और नेतृत्व में शिक्षित लोगों की भागीदारी से सकारात्मक बदलाव आएगा।

हालांकि इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे प्रगतिशील कदम बताते हुए समर्थन किया, जबकि कुछ का कहना है कि नेतृत्व क्षमता केवल शैक्षणिक योग्यता से तय नहीं होती। इसके बावजूद सभा का मानना है कि न्यूनतम शिक्षा योग्यता से संगठनात्मक कार्यों में पारदर्शिता और समझ बढ़ेगी।

सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के फैसले भविष्य में अन्य सामाजिक संगठनों को भी प्रेरित कर सकते हैं। हरियाणा में पहले भी पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर बहस हो चुकी है और अब सामाजिक संगठनों में भी शिक्षा आधारित नेतृत्व की मांग बढ़ती दिखाई दे रही है।

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