नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संघ चुनाव की दस्तक के साथ ही छात्र राजनीति का पारा चढ़ने लगा है। विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित विधि केंद्र, लॉ सेंटर-1 (एलसी-1) में भी चुनावी गहमागहमी अपने शबाब पर है। उत्तर परिसर स्थित उमंग भवन और आसपास के अध्ययन स्थलों पर सुबह से शाम तक प्रत्याशियों के जनसंपर्क अभियान, पोस्टर, और नारों की गूंज स्पष्ट सुनाई दे रही है। इस वर्ष चुनाव में विभिन्न पदों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ ले चुका है। अध्यक्ष पद के लिए जहाँ उमंग पाठक और तुषार कुशवाहा के बीच मुख्य होड़ देखी जा रही है वहीं उपाध्यक्ष पद पर शिवम गौतम और निशांत राणा पूरी ताकत से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालाँकि परिसर के आम विद्यार्थियों के बीच सर्वाधिक चर्चा सचिव पद को लेकर हो रही है जहाँ यशवंत मिश्रा और अरशद अपनी-अपनी मजबूत दावेदारी के साथ आमने-सामने हैं।
लॉ सेंटर-1 का चुनावी परिदृश्य इस बार केवल भाषणों और शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है अपितु विद्यार्थी बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक आवश्यकताओं से जुड़े ठोस मुद्दों पर प्रत्याशियों का आकलन कर रहे हैं। इस क्रम में सचिव पद के प्रत्याशी यशवंत मिश्रा की सक्रियता और उनका मुद्दा आधारित प्रचार अभियान छात्रों के बीच ध्यानाकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यशवंत मिश्रा ने कक्षाओं, पुस्तकालयों और अध्ययन क्षेत्रों में जाकर निरंतर संवाद स्थापित किया है। हमसे हुई विशेष बातचीत के दौरान यशवंत मिश्रा ने स्वीकार किया कि विधि के विद्यार्थियों के पास समय कम और चुनौतियाँ अधिक होती हैं, ऐसे में छात्र प्रतिनिधि का मुख्य उत्तरदायित्व केवल भाषण देना नहीं बल्कि परिसर की व्यावहारिक समस्याओं को समयबद्ध ढंग से सुलझाना है। उनके अनुसार प्रशासनिक उदासीनता के कारण वर्षों से लंबित पड़े विषयों को अब प्राथमिकता के आधार पर हल करना अनिवार्य हो चुका है।
यशवंत मिश्रा के चुनावी घोषणापत्र में सबसे प्रमुख विषय ‘प्लेसमेंट और इंटर्नशिप सेल’ का पुनर्गठन तथा उसका सुचारु संचालन है। देश के अग्रगण्य लॉ कॉलेजों में शुमार होने के बावजूद लॉ सेंटर-1 में छात्रों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण इंटर्नशिप व प्लेसमेंट के अवसर प्राप्त करने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। यशवंत का कहना है कि विधि स्नातकों के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होता उन्हें उच्च न्यायालयों, उच्चतम न्यायालय, कॉर्पोरेट लॉ फर्मों तथा विभिन्न वैधानिक निकायों में व्यावहारिक कार्य अनुभव की सख्त आवश्यकता होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि वे सचिव चुने जाते हैं, तो एक समर्पित और पारदर्शी ‘करियर व प्लेसमेंट सेल’ की स्थापना कराई जाएगी जो प्रथम वर्ष से ही छात्रों को प्रसिद्ध अधिवक्ताओं, कॉर्पोरेट घरानों और लीगल एडवाइजरी फर्मों से जोड़ने का कार्य करेगी। इससे न केवल छात्रों को प्लेसमेंट के बेहतर अवसर मिलेंगे अपितु इंटर्नशिप ढूंढने की व्यक्तिगत जद्दोजहद से भी राहत मिलेगी।
परिसर की आधारभूत संरचना को दुरुस्त करना यशवंत मिश्रा के एजेंडे का मुख्य हिस्सा है। वर्तमान में लॉ सेंटर-1 के उमंग भवन में वॉटर कूलरों के पानी का टीडीएस (TDS) स्तर मानक से काफी अधिक होने के कारण पेयजल स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यशवंत ने परिसर में आधुनिक आरओ प्रणाली और नियमित जल जाँच कराने का वादा किया है। इसके अलावा उन्होंने पूरे परिसर को हाई-स्पीड वाई-फाई जोन बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
उमंग भवन स्थित कैंटीन की दुर्व्यवहारिता, स्वच्छता के अभाव और महँगे भोजन का मुद्दा भी चुनाव में प्रमुखता से छाया हुआ है। यशवंत ने कैंटीन की दरों पर नियंत्रण, स्वच्छ भोजन और बैठक क्षमता के विस्तार का संकल्प लिया है। साथ ही विधि छात्रों की आवश्यकताओं को देखते हुए पुस्तकालय की समयावधि बढ़ाने, रात्रि अध्ययन के दौरान सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा मूठ कोर्ट (Moot Court) प्रतियोगिताओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता दिलाने को भी अपने एजेंडे में शामिल किया है।
दूसरी ओर सचिव पद के प्रतिद्वंद्वी अरशद भी छात्र-एकता और प्रशासनिक जवाबदेही के दावों के साथ जनसंपर्क साध रहे हैं। वहीं अध्यक्ष पद पर उमंग पाठक व तुषार कुशवाहा तथा उपाध्यक्ष पद पर शिवम गौतम व निशांत राणा प्रचार में डटे हैं।
हालाँकि चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में यशवंत मिश्रा द्वारा उठाए गए व्यावहारिक मुद्दे चाहे वह पानी का टीडीएस स्तर हो, प्लेसमेंट सेल की स्थापना हो या कैंटीन सुधार छात्रों के बीच अधिक गहराई से संवाद स्थापित करते दिख रहे हैं। आम विद्यार्थियों का मानना है कि इस बार मुकाबला हवा-हवाई वादों पर नहीं बल्कि धरातल पर काम करने वाले प्रत्याशी के पक्ष में झुक सकता है। अब देखना यह होगा कि मतदान के दिन लॉ सेंटर-1 के छात्र किस प्रत्याशी की प्राथमिकताओं पर अपनी मुहर लगाते हैं।
डीयू के एलसी-1 में चुनावी सरगर्मी तेज: सचिव पद पर यशवंत और अरशद के बीच मुकाबला, छात्र मुद्दों पर टिकी नजरें
Date:
