नैनीताल, 02 मई 2026 । चुनावी मामलों में हो रही देरी पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने एक साल से लंबित पड़े मामलों पर नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा अब निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाना चाहिए। इसी के तहत अदालत ने निर्देश दिया है कि ऐसी याचिकाओं पर अधिकतम 6 महीने के अंदर फैसला सुनाया जाए।
याचिकाकर्ता के वकील अभिजय नेगी ने बताया कि आशीष खत्री, जिन्होंने 23 जनवरी 2025 को हुए नगर निगम चुनाव लड़ा था, ने प्रशांत खरोरा की जीत को चुनौती दी है। याचिका के अनुसार श्री खत्री को 2,811 वोट मिले थे और वे खरोरा से महज 26 वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे। याचिका में चुनावी कदाचार और आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि खरोरा के नामांकन पत्र पर 28 दिसंबर 2024 की तारीख़ का नोटरी सत्यापन था, जबकि दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर 29 दिसंबर को किए गए थे और उसी दिन जमा किया गया था।
कोर्ट का मानना है कि चुनाव से जुड़े विवादों का समय पर समाधान बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है। लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने से न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि जनप्रतिनिधित्व पर भी सवाल खड़े होते हैं।
इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है। इसलिए निचली अदालतों और संबंधित न्यायिक संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनाव याचिकाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनें और तय समयसीमा में उनका निपटारा करें।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्देश चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों को भरोसा मिलेगा कि चुनावी विवादों का समाधान समय पर होगा।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। यह कदम न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन और गति लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह आदेश चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
