“बिहारी को कभी गोली तो कभी गाली” — तेजस्वी यादव का BJP पर तीखा हमला, बिहार के सम्मान का मुद्दा फिर गरमाया

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बिहार , 01 मई 2026 । बिहार की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि “बिहारी को कभी गोली मिलती है तो कभी गाली,” और तंज कसते हुए सुझाव दिया कि भाजपा को बिहार का नाम बदलकर “श्रमिक प्रदेश” रख देना चाहिए।

यादव ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर श्रमिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश निर्माण में मजदूरों का योगदान अतुलनीय रहा है, लेकिन उनके उत्थान और बेहतरी पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। यादव ने कहा कि श्रमिकों, उनके परिवारों और गांवों के विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना करना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों का सीधा असर मजदूरों एवं कामगारों पर ही पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले 21 वर्षों से राजग सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के कारण ही प्रतिवर्ष बिहार से लगभग चार करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते है। पलायन संबंधित यह तथ्यपरक आंकड़ा भयावह है।

तेजस्वी यादव ने यह बयान देते हुए कहा कि देशभर में काम की तलाश में जाने वाले बिहारी मजदूरों को अक्सर भेदभाव और अपमान का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि केंद्र और भाजपा शासित राज्यों में बिहार के लोगों के साथ न्याय नहीं हो रहा, और उनकी सुरक्षा तथा सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग देश के हर कोने में मेहनत करके अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सम्मान के बजाय तिरस्कार मिलता है। तेजस्वी ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय गरिमा से जुड़ा विषय बताया।

वहीं, Bjp के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिहार सहित देश के हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जाते हैं और इससे समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे को केंद्र में लाता है, जो लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक विषय बना हुआ है। रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर अक्सर बहस होती रही है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब श्रमिकों के अधिकार और सम्मान को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में इस तरह के बयान आने वाले समय में राजनीतिक माहौल को और गरमा सकते हैं।

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