तेल अवीव , 23 मार्च 2026 ।डिमोना पर हुए हमले ने इज़राइल की मजबूत मानी जाने वाली डिफेंस प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिमोना, जहां देश का अत्यंत संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठान स्थित है, उस पर हमला होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है।
लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की
ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। दोनों हमलों को रोकने में आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, एरो-3 और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम THAAD फेल हो गए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा आयरन डोम जैसी उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को लेकर हो रही है। आमतौर पर यह सिस्टम रॉकेट और मिसाइल हमलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस हमले ने इसकी सीमाओं को उजागर कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला या तो अत्याधुनिक तकनीक के जरिए किया गया, या फिर एक साथ कई लक्ष्यों पर हमले (saturation attack) के कारण डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ा, जिससे कुछ हमले रोकने में चूक हो सकती है।
हालांकि, इज़राइली सेना ने अब तक इस घटना पर सीमित जानकारी ही साझा की है, लेकिन यह स्पष्ट है कि सुरक्षा तंत्र की समीक्षा और मजबूती की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना का असर केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है, क्योंकि डिमोना का परमाणु महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील माना जाता है।
कुल मिलाकर, यह हमला दिखाता है कि अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली भी पूरी तरह अचूक नहीं होती और बदलते युद्ध के स्वरूप के साथ सुरक्षा रणनीतियों को लगातार अपडेट करना जरूरी है।
