- कहा कि संस्थागत उपेक्षा को सुधार रही है हमारी सरकार
नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025 । लगभग एक दशक बाद दिल्ली बाढ़ एवं सिंचाई नियंत्रण बोर्ड की बैठक आयोजित हुई, जिसमें राजधानी की गतिशीलता, जल निकासी क्षमता और शहरी सुरक्षा को बदलने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंज़ूरी दी गई। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में नजफगढ़ ड्रेन और शाहदरा लिंक ड्रेन से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्टों को हरी झंडी मिली।
इनमें झटिकरा से बसईदारापुर तक दोनों तटों पर दो-लेन सेवा मार्गों का ₹453.95 करोड़ का निर्माण कार्य, और नजफगढ़ ड्रेन में जमा 91 लाख घन मीटर पुरानी गाद को हटाने के लिए बड़े स्तर पर डीसिल्टिंग अभियान हेतु EOI जारी करना शामिल है। बोर्ड ने सड़क चौड़ीकरण, एलिवेटेड कॉरिडोर और वैज्ञानिक सिल्ट निस्तारण जैसे उन्नत मोबिलिटी उपायों की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त कैलाश नगर ड्रेन के रीमॉडलिंग, क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल के पुनर्निर्माण, शाहदरा लिंक ड्रेन के सौंदर्यीकरण और ट्रंक ड्रेन नंबर-1 के साथ एलिवेटेड रोड के व्यवहार्यता अध्ययन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए PWD और I&FC मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि सरकार वर्षों की संस्थागत उपेक्षा को सुधार रही है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक नालों की अनदेखी की गई, जिसके कारण जलभराव, ट्रैफिक जाम और अस्वच्छ वातावरण की समस्या बढ़ी। हमारी सरकार मिशन मोड में इस उपेक्षा को सुधारने का काम कर रही है। आज लिए गए फैसले ग्रामीण दिल्ली और आसपास की विधानसभा क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को सीधी राहत देंगे I
₹453.95 करोड़ का सेवा मार्ग प्रोजेक्ट – नजफगढ़ ड्रेन पर 57 किमी का नया मोबिलिटी कॉरिडोर
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय नजफगढ़ ड्रेन के दोनों तटों पर कठोर दो-लेन सेवा मार्गों के निर्माण का है। छावला ब्रिज, बसईदारापुर और झटिकरा के बीच यह लगभग 57 किमी लंबा मार्ग UER-II, आउटर रिंग रोड और इनर रिंग रोड के समानांतर चलता है, लेकिन वर्षों से इसका उपयोग सीमित था। इस कॉरिडोर के विकसित होने पर यह तेज़, वैकल्पिक और उच्च-क्षमता वाला यात्रा मार्ग बन जाएगा।
नया मार्ग प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक लोड कम करेगा, इंडस्ट्रियल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, आपात स्थिति में वैकल्पिक रूट उपलब्ध कराएगा और पश्चिम व दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के यात्रियों को बड़ी राहत देगा।
इसके महत्व को रेखांकित करते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा-
“यह 57 किमी का स्ट्रेच दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण मोबिलिटी कॉरिडोर में बदल सकता है। इसे संरचित सेवा मार्ग नेटवर्क के रूप में विकसित कर हम नजफगढ़, मटियाला, उत्तम नगर, विकासपुरी और पश्चिमी दिल्ली के लाखों यात्रियों की आवाजाही को आसान बना रहे हैं।”
बोर्ड ने निचले हिस्सों में एलिवेटेड कॉरिडोर की संभावनाओं का अध्ययन करने को भी कहा।
नजफगढ़ ड्रेन की तकनीक-आधारित डीसिल्टिंग – EOI जारी
नजफगढ़ ड्रेन में वर्षों से जमा भारी गाद को हटाकर इसकी प्रवाह क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर डीसिल्टिंग हेतु EOI स्वीकृत की गई। विस्तृत बाथिमेट्रिक सर्वे में 91 लाख घन मीटर गाद का जमाव पाया गया, जिससे नालों की क्षमता घट रही थी और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा था।
EOI के माध्यम से आधुनिक ड्रेजिंग सिस्टम, एंफिबियस मशीनें और हाइड्रोलिक उपकरणों से लैस अनुभवी एजेंसियों को शामिल किया जाएगा। पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक गाद निस्तारण प्रणाली भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
इस अभियान से नजफगढ़ ड्रेन की कैरीइंग कैपेसिटी में वृद्धि होगी, मानसून में जलभराव में कमी आएगी और उत्तर, पश्चिम व मध्य दिल्ली में सफाई और स्वच्छता में सुधार होगा।
ट्रंक ड्रेन नंबर-1 पर एलिवेटेड रोड – पूर्वी दिल्ली की 5 विधानसभाओं को राहत
घनी आबादी वाले पूर्वी दिल्ली क्षेत्रों को राहत देने के लिए ट्रंक ड्रेन नंबर-1 के साथ एलिवेटेड रोड निर्माण का विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन भी मंज़ूर किया गया। यह कॉरिडोर भीड़भाड़ कम करेगा, आवागमन सुव्यवस्थित करेगा और आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करेगा।
शाहदरा लिंक ड्रेन का सौंदर्यीकरण, बाउंड्री वॉल पुनर्निर्माण और कैलाश नगर ड्रेन रीमॉडलिंग
बोर्ड ने कई नागरिक-सुविधा से जुड़े कार्यों को हरी झंडी दी
● शाहदरा लिंक ड्रेन का सौंदर्यीकरण -पैदल मार्ग, लैंडस्केपिंग और सार्वजनिक स्थानों का विकास (बरापुला मॉडल पर आधारित)।
● प्रमुख नालों के साथ क्षतिग्रस्त या टूटी हुई बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण -कचरा फेंके जाने पर रोक और सुरक्षा बढ़ाने के लिए।
● कैलाश नगर ड्रेन का रीमॉडलिंग -MCD और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के संयुक्त समन्वय से तेज़ी से कार्यान्वयन।
इन कार्यों से गांधी नगर, सीलमपुर, मुस्तफाबाद और आसपास के क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा।
बैठक के अंत में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सख्त निगरानी और पारदर्शिता पर जोर दिया।
“हर रुपये की निगरानी होगी और हर प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। दिल्ली को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। आज लिए गए फैसले लंबे समय तक राहत, बेहतर मोबिलिटी और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करेंगे,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि स्वीकृत प्रोजेक्ट और अध्ययन ग्रामीण व पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थाई समाधान प्रदान करेंगे।
