सबरीमाला गोल्ड चोरी मामले में केस दर्ज ​​​​​​​​​​​​​करने का आदेश

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केरल , 09 अक्टूबर 2025 । केरल की सर्वोच्च न्यायालय (High Court) ने सबरीमाला मंदिर से कथित रूप से चोरी हुई सोने-प्लेटिंग (gold plating) मामलों की जांच को तीव्र गति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस को क्रिमिनल मामला (FIR / प्राथमिकी दर्ज करने) का निर्देश दिया है और विशेष जांच दल (SIT) को छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस दिशा में उठाया गया कदम धार्मिक सौंदर्य और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने की लड़ाई का हिस्सा माना जा रहा है।

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अब तक की जांच से लग रहा है कि सबरीमाला मंदिर के गेट पर रखी दो प्रतिमाओं (द्वारपालक) से सोने की हेराफेरी हुई है। कोर्ट ने मामले में क्रिमिनल केस दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया।

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने SIT को छह हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने और हर दो हफ्ते में एक बार जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए।

बेंच ने आगे कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि उन्नीकृष्णन पोट्टी (सोने की परत चढ़ाने की पेशकश करने वाले प्रायोजक) को काफी मात्रा में सोना सौंपा गया था। कोर्ट ने कहा कि पोट्टी को लगभग 474.9 ग्राम सोना दिया गया था। हालांकि, रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि इतना सोना त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) को (उसके द्वारा) सौंपी गई थी।

इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर के द्वारपालकों की मूर्तियों से गोल्ड चोरी के मामले में चिंता जताई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि केस के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने TDB अध्यक्ष को जो ईमेल भेजा था, उससे पता चलता है कि TDB में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

हाईकोर्ट ने उन्नीकृष्णन के ईमेल का जिक्र किया। इसमें उन्होंने TDB अध्यक्ष को लिखा था कि मंदिर के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों पर गोल्ड प्लेट चढ़ाने के बाद कुछ सोना बचा है, जिसे मैं एक जरूरतमंद लड़की की शादी में दान देना चाहता हूं। इसमें मुझे TDB का सहयोग चाहिए। हाईकोर्ट ने SIT गठित की जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की बेंच ने इस मामले की जांच के लिए एक SIT गठित की है। यह छह हफ्ते में रिपोर्ट पेश करेगी। SIT सीधे अदालत को रिपोर्ट करेगी। साथ ही सुनिश्चित करेगी कि जांच अत्यंत गोपनीयता और ईमानदारी से की जाए।

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