“विज्ञान और धर्म दोनों से नहीं मिली शांति” — भागवत का बयान, छिड़ी नई बहस

Date:

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026 । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख , सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि केवल विज्ञान या केवल धर्म, दोनों में से किसी एक के सहारे मानव समाज को पूर्ण शांति नहीं मिल पाई है। उनके इस बयान ने समाज, दर्शन और विचारधारा के स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

भागवत ने कहा कि पहले सत्ता राजा को दी गई, लेकिन बाद में राजा ही जनता का शोषण करने लगा। इसके बाद लोगों ने भगवान को सर्वोच्च मानकर धर्म बनाए, लेकिन इससे भी खून-खराबा नहीं रुका।

  • विज्ञान के दौर में भी मानव की समस्याएं खत्म नहीं हुईं। लोगों ने कहा कि हम वैज्ञानिक हैं, जब तक भगवान लैब में नहीं दिखेगा, हम नहीं मानेंगे। इसके बाद विज्ञान का दौर आया। कई सुविधाएं और आराम मिले, लेकिन संतोष नहीं आया।
  • आज भी दुनिया में दुख है, परिवार टूट रहे हैं, अपराध बढ़ रहे हैं। युद्ध शुरू होते हैं तो रुकते नहीं। विकास जितना बढ़ रहा है, पर्यावरण उतना ही नष्ट हो रहा है।
  • अब 2000 साल के इन प्रयोगों के बाद दुनिया भटक रही है और भारत के ज्ञान की ओर उम्मीद से देख रही है। उन्होंने इसे भारत का कर्तव्य बताया और कहा कि यही भारत के जीवन का उद्देश्य है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि मानवता को स्थायी शांति के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें विज्ञान की प्रगति और आध्यात्मिक मूल्यों का संतुलित मेल हो। भागवत के अनुसार, केवल भौतिक विकास या केवल आध्यात्मिक विचारधारा से समाज की सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आधुनिक समय में बढ़ती तकनीकी प्रगति और साथ ही सामाजिक-मानसिक तनाव के बीच संतुलन की जरूरत को दर्शाता है। आज के दौर में जहां एक ओर विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मानसिक शांति और संतुलन की खोज भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है।

कुल मिलाकर, यह बयान केवल एक विचार नहीं, बल्कि समाज को एक संतुलित दिशा में सोचने का संकेत भी माना जा रहा है, जहां विज्ञान और धर्म दोनों की भूमिका को समझकर आगे बढ़ा जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related