ईरान पर हमले के लिए कैसे माने थे ट्रम्प

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वॉशिंगटन  ,  08 अप्रैल 2026 । डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर कई बार तनाव चरम पर पहुंचा। सवाल यह रहा कि आखिर किन परिस्थितियों और रणनीतिक कारणों ने ट्रम्प को इस तरह के सख्त कदमों के लिए तैयार किया।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले।

पहले कैबिनेट रूम में बातचीत हुई और फिर उन्हें व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ले जाया गया, जहां असली बैठक हुई। यह वही जगह है जहां अमेरिका युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले करता है, लेकिन आमतौर पर यहां विदेशी नेताओं को नहीं लाया जाता।

आमतौर पर जब कोई बड़ी मीटिंग होती है, तो ट्रम्प वह टेबल के सबसे आगे यानी ‘हेड’ वाली कुर्सी पर बैठते हैं। वहां से वह सबको देखते हैं और बैठक को लीड करते हैं। लेकिन इस मीटिंग में ट्रम्प टेबल के किनारे (साइड) पर जाकर बैठे, और उनका चेहरा दीवार पर लगी बड़ी स्क्रीन की तरफ था।

सबसे बड़ा कारण था मध्य-पूर्व में अमेरिका के हितों की सुरक्षा। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चाहता है। ईरान पर आरोप लगाए जाते रहे कि वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और अमेरिका विरोधी समूहों को समर्थन देने में शामिल है।

इसके अलावा, परमाणु कार्यक्रम भी एक बड़ा मुद्दा रहा। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के न्यूक्लियर डील से अलग होने का फैसला लिया और उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। उनका मानना था कि यह समझौता अमेरिका के हितों के खिलाफ है और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए सख्ती जरूरी है।

एक और अहम वजह थी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमलों का खतरा। खाड़ी क्षेत्र में कई घटनाओं के बाद ट्रम्प प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए। इस दौरान ड्रोन हमलों और सैन्य कार्रवाई की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

हालांकि, हर बार पूर्ण युद्ध की स्थिति बनने से पहले कूटनीतिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित नुकसान को देखते हुए कई कदमों को सीमित रखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रम्प की रणनीति “अधिकतम दबाव” (Maximum Pressure) की थी, जिसमें आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक अलगाव और सैन्य दबाव शामिल थे।

कुल मिलाकर, ईरान पर हमले की तैयारी केवल एक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह कई राजनीतिक, सैन्य और रणनीतिक कारणों का मिश्रण था, जिसने उस समय वैश्विक राजनीति को काफी प्रभावित किया।

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