वॉशिंगटन /तेहरान, 07 अप्रैल 2026 । अमेरिका की सबसे एलिट स्पेशल फोर्स SEAL Team 6 ने एक बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पहाड़ी इलाके में फंसे एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित बचा लिया। इस मिशन को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित समय के बीच सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
अमेरिका ने ईरान में लापता दोनों पायलट्स को 36 घंटे के भीतर रेस्क्यू कर लिया। ईरान में 3 अप्रैल को एक ऑपरेशन पर गए F-15E फाइटर जेट्स पर हमला हुआ था। विमान के क्रैश होने से पहले दोनों पायलट्स पैराशूट की मदद से इजेक्ट हो गए थे।
इसमें से एक पायलट को अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटे बाद ढूंढ़ लिया जबकि दूसरे के लिए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसकी सफलता की तारीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी की। उन्होंने इसे देश के इतिहास का सबसे खतरनाक रेस्क्यू मिशन बताया।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट ‘सील टीम-6’ ने इसे अंजाम दिया। यह वही स्पेशल फोर्स है जिसने 2011 में आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर मारा था।
एक सैनिक को बचाने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल हुआ, जो इसकी अहमियत दिखाता है। मिशन को सफल बनाने के लिए अमेरिका ने कई लेयर में रणनीति बनाई। पहले, इजराइली खुफिया एजेंसी ने ईरानी सेना की मूवमेंट ट्रैक की। फिर हवाई हमले 36 घंटे के लिए रोके गए ताकि रेस्क्यू टीम आगे बढ़ सके।
इसके बाद CIA ने फर्जी जानकारी फैलाई कि ऑफिसर सड़क से भाग निकला है। ऊपर अमेरिकी फाइटर जेट्स निगरानी कर रहे थे, जबकि जमीन पर कमांडो आगे बढ़ रहे थे।
अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट SEAL टीम-6 ने ऑपरेशन शुरू किया। जब कमांडो अफसर तक पहुंचे, तब ईरानी सेना बेहद करीब थी। ऐसे में भारी गोलीबारी कर दुश्मन को पीछे धकेला गया। इसके बाद ट्रांसपोर्ट विमान फायरिंग के बीच उतरे और घायल अफसर को बाहर निकाला गया।
सूत्रों के अनुसार, पायलट का विमान किसी तकनीकी खराबी या दुर्घटना के कारण दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में गिर गया था। घटना की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें विशेष प्रशिक्षित कमांडो को तैनात किया गया।
रेस्क्यू टीम को खराब मौसम, ऊंचाई और दुर्गम रास्तों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, कमांडो ने सटीक योजना और तेज कार्रवाई के जरिए पायलट तक पहुंच बनाई और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान अत्याधुनिक उपकरणों और हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। पायलट को प्राथमिक उपचार देने के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन न केवल तकनीकी दक्षता बल्कि टीमवर्क और त्वरित निर्णय क्षमता का भी उदाहरण होते हैं। SEAL Team 6 पहले भी कई हाई-रिस्क मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुकी है।
यह मिशन एक बार फिर दर्शाता है कि आधुनिक सैन्य बल किस तरह कठिन परिस्थितियों में भी अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
