नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 ।भारत में लागू किए जा रहे नए लेबर कोड (Labour Codes) नौकरीपेशा लोगों के लिए कई अहम बदलाव लेकर आ रहे हैं। इनमें सबसे चर्चित बदलाव है—बची हुई छुट्टियों (Earned Leave) का कैश लाभ। अब कर्मचारियों की मेहनत से अर्जित छुट्टियां बेकार नहीं जाएंगी, बल्कि उन्हें इसके बदले हर साल आर्थिक लाभ मिलेगा।
पुराने नियमों के मुताबिक कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों का पैसा आमतौर पर रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय ही निकाल सकते थे लेकिन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020 के तहत इसमें बड़े बदलाव किए गए है,
क्या है नया नियम?
नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को कर्मचारियों की Earned Leave (EL) को लेकर स्पष्ट नीति बनानी होगी। यदि कर्मचारी अपनी सभी छुट्टियों का उपयोग नहीं कर पाता है, तो बची हुई छुट्टियों को:
- अगले साल कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है
- या फिर कर्मचारी को उसका मौद्रिक भुगतान (Encashment) किया जा सकता है
कितनी छुट्टियां मिलेंगी?
नियम के अनुसार:
- हर 20 दिन काम करने पर कर्मचारी को 1 दिन की Earned Leave मिलेगी
- यानी साल भर में लगभग 18–20 दिन की छुट्टी बनती है
छुट्टियों की लिमिट और कैश बेनिफिट
- अधिकतम 300 दिनों तक की छुट्टियां जमा (accumulate) की जा सकती हैं
- यदि यह सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त छुट्टियों का कैश भुगतान अनिवार्य होगा
- कर्मचारी नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर भी अपनी बची छुट्टियों का पैसा ले सकता है
किसे मिलेगा फायदा?
- प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी
- कॉर्पोरेट कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल
- फैक्ट्री व संगठित क्षेत्र के कर्मचारी
यह नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो काम के दबाव के चलते छुट्टियां नहीं ले पाते।
क्यों है यह नियम महत्वपूर्ण?
- वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा
- कर्मचारियों को मिलेगा अतिरिक्त आर्थिक लाभ
- कंपनियों में छुट्टियों को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी
- कर्मचारियों की मेहनत का मिलेगा सीधा मूल्य
क्या ध्यान रखें?
- हर कंपनी अपनी HR पॉलिसी के अनुसार नियम लागू करेगी
- कुछ कंपनियां छुट्टियों को कैरी फॉरवर्ड करने की सीमा तय कर सकती हैं
- Encashment का तरीका (सालाना या अंत में) कंपनी पर निर्भर करेगा
