देहरादून में ट्रांसजेंडर संशोधन बिल के खिलाफ विरोध

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देहरादून , 23 मार्च 2026 । देहरादून में ट्रांसजेंडर समुदाय और सामाजिक संगठनों ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल 2026 के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध के तहत समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार से इस बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की।

संसद में हाल ही में पेश किए गए ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल 2026 के खिलाफ दून में भी ट्रांसजेंडर समुदाय और उनके समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को तिब्बती मार्केट के पास स्थित रेस्त्रां में ट्रांसजेंडर समुदाय और सहयोगी संस्थाओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर इस बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की। समुदाय का कहना है कि यह बिल बिना उनकी राय लिए लाया गया है और यह उनके वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकारों को छीनने वाला है। प्रेसवार्ता में ओशिन, मीरा और नैना आदि ने समुदाय का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च 2026 को लोकसभा में यह बिल पेश किया था। जिसे 23 मार्च को संसद में चर्चा के लिए लाया जाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह संशोधन बिल उनके संवैधानिक अधिकारों, पहचान और गरिमा के खिलाफ है। उनका आरोप है कि बिना समुदाय से पर्याप्त परामर्श किए यह विधेयक लाया गया है, जिससे वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि नए प्रावधानों में जेंडर पहचान का अधिकार व्यक्ति से हटाकर सरकारी मेडिकल बोर्ड को सौंपने का प्रस्ताव है। समुदाय का मानना है कि इससे “स्व-परिभाषित जेंडर पहचान” का अधिकार कमजोर होगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के ऐतिहासिक NALSA बनाम भारत संघ (2014) फैसले में मान्यता दी थी।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बिल ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित करता है और केवल कुछ पारंपरिक पहचान समूहों (जैसे हिजड़ा या किन्नर) तक ही मान्यता देता है, जिससे ट्रांस पुरुष, ट्रांस महिला और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इसे केवल कानूनी नहीं बल्कि “अस्तित्व और सम्मान” का मुद्दा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिल को वापस नहीं लिया गया, तो देशभर में विरोध और तेज किया जाएगा।

यह विरोध सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में भी ट्रांसजेंडर समुदाय इस संशोधन के खिलाफ आवाज उठा रहा है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े सामाजिक और कानूनी बहस का रूप लेता जा रहा है।

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