भारत-EU डील से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव, लाखों नौकरियों पर संकट की आशंका

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इस्लामाबाद, 02 फ़रवरी 2026 । भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच संभावित या प्रगति कर रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताएं दक्षिण एशिया की आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय खोल रही हैं। यदि यह डील व्यापक रूप से लागू होती है, तो इसका असर सिर्फ भारत-EU व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी देशों—खासतौर पर पाकिस्तान—पर भी पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तान की बड़ी निर्यात निर्भरता होने के कारण वहां रोजगार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से पाकिस्तान में 1 करोड़ नौकरियां खतरे में हैं। उसे अरबों डॉलर के नुकसान का भी डर है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस समझौते को लेकर गुरुवार को कहा कि वह EU के अधिकारियों के संपर्क में है। वो ये समझने की कोशिश कर रहा है कि भारत-EU FTA का उसके निर्यात पर क्या असर पड़ेगा।

रोजगार पर संभावित असर इसी संदर्भ में चर्चा में आता है। पाकिस्तान के औद्योगिक शहरों में बड़ी आबादी निर्यात-उन्मुख उद्योगों पर निर्भर है। यदि निर्यात घटते हैं या उत्पादन कम होता है, तो छंटनी, कम वेतन या अस्थायी बंदी जैसी स्थितियां बन सकती हैं। यही वजह है कि कुछ आर्थिक आकलनों में बड़े पैमाने पर रोजगार जोखिम की बात कही जा रही है, हालांकि वास्तविक प्रभाव कई कारकों—वैश्विक मांग, मुद्रा दर, ऊर्जा लागत और सरकारी नीतियों—पर निर्भर करेगा।

भारत के लिए अवसर, पाकिस्तान के लिए चुनौती वाला परिदृश्य उभर सकता है। भारत पहले से आईटी, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी में EU के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। यदि निवेश प्रवाह और सप्लाई चेन शिफ्ट भारत की ओर होती है, तो क्षेत्रीय उत्पादन संतुलन बदल सकता है। पाकिस्तान, जो पहले से विदेशी मुद्रा संकट, ऊर्जा लागत और कर्ज दबाव से जूझ रहा है, उसके लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है।

भूराजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। व्यापार समझौते अक्सर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हैं। भारत-EU आर्थिक नजदीकी से वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ सकती है। इससे निवेशक स्थिर और बड़े बाजार को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे छोटे या अस्थिर अर्थतंत्रों पर दबाव बनता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि व्यापार प्रतिस्पर्धा शून्य-योग (zero-sum) खेल नहीं होती। पाकिस्तान भी अपने व्यापार समझौतों, निर्यात विविधीकरण और उद्योग सुधारों के जरिए स्थिति संभाल सकता है। यदि वह टेक्सटाइल से आगे बढ़कर वैल्यू-ऐडेड उत्पाद, आईटी सेवाएं या क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है, तो नुकसान को सीमित किया जा सकता है।

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