कांग्रेस बोली-ट्रम्प का 71वीं बार भारत-PAK युद्ध रुकवाने का दावा

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नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026 । कांग्रेस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे लेकर तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प अब 71वीं बार यह दावा कर चुके हैं, जबकि भारत सरकार और भारतीय विदेश मंत्रालय पहले ही ऐसे बयानों को तथ्यों से परे बता चुके हैं। कांग्रेस के मुताबिक, इस तरह के दावे भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने के दावे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसा है। ट्रम्प ने बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध को रुकवाया था। कांग्रेस ने कहा कि यह ट्रम्प का 71वां दावा है।

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रम्प के बयान का वीडियो शेयर किया। जिसके साथ लिखा ‘कल तक गिनती 70 थी और आज यह 71 हो गई है। यह याद रखना चाहिए कि दावोस में भारत का एक बड़ा भारतीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद है।’

डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा कि उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोका था। दोनों देश न्यूक्लियर युद्ध के करीब पहुंच गए थे। हमने लाखों लोगों की जान बचाई।

पार्टी ने यह मुद्दा भी उठाया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे बयान भारत की स्थिति को कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद, कश्मीर और सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में भारत का रुख हमेशा सख्त और स्पष्ट रहा है, ऐसे में किसी विदेशी नेता द्वारा बार-बार युद्ध रुकवाने का श्रेय लेना भ्रामक नैरेटिव गढ़ने जैसा है।

इस बयानबाजी के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इस मुद्दे पर ज्यादा स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाना चाहिए, ताकि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभु निर्णय प्रक्रिया पर कोई सवाल न उठे। वहीं, सत्तापक्ष के समर्थकों का कहना है कि भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और ऐसे बयानों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए।

कुल मिलाकर, ट्रम्प के बार-बार दोहराए जा रहे दावे और उस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने भारत-पाकिस्तान संबंधों, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और घरेलू राजनीति—तीनों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर किस तरह की आधिकारिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया देती है।

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