विजेन्द्र गुप्ता ने रोहिणी में वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट्स का निरीक्षण किया

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  • धूल प्रदूषण पर सख्त रुख, रोहिणी में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए समन्वित नागरिक कार्रवाई पर ज़ोर

नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2025 ।

“सड़क की धूल और अधूरे नागरिक कार्यों से उत्पन्न वायु प्रदूषण कोई अपरिहार्य वास्तविकता नहीं, बल्कि एक रोके जा सकने वाली प्रशासनिक चुनौती है। इसके लिए समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रशासन और कठोर जवाबदेही आवश्यक है,” यह बात दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक विजेन्द्र गुप्ता ने रोहिणी सेक्टर-8 स्थित मधुबन चौक पर निरीक्षण के दौरान कही।

हालिया आकलनों में रोहिणी के कई क्षेत्रों को धूल-प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, जहाँ सड़कें खुदी हुई, बिना तारकोल की या ढीली मिट्टी से ढकी हुई हैं। इन खुले हिस्सों पर वाहनों की आवाजाही से बार-बार धूल उड़ती है। साथ ही, प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के अंतर्गत ड्रेनेज सहित विभिन्न अवसंरचना कार्यों के स्थगन के कारण सड़क सतहों का लंबे समय तक पुनर्स्थापन नहीं हो पाया है। स्थानीय निवासियों ने कई महीनों से धूल के निरंतर संपर्क की शिकायत की है, जिससे जनस्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।

गुप्ता ने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सड़क की धूल दिल्ली में कणीय प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है, जो पीएम10 का बड़ा हिस्सा और पीएम2.5 का भी महत्वपूर्ण योगदान करती है, विशेषकर शीतकाल में, जब स्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ प्रदूषण को और गंभीर बना देती हैं। उन्होंने बताया कि अधूरे उपयोगिता कार्यों के बाद सड़क बहाली में कमी, यांत्रिक सफाई और धूल-दमन उपायों की कमी, विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव तथा क्षतिग्रस्त सड़कों पर यातायात से धूल का पुनःउत्थान—ये सभी कारक समस्या को और बढ़ाते हैं।

इन निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए,अध्यक्ष ने रोहिणी के चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर तत्काल और स्पष्ट सुधारात्मक उपायों के निर्देश दिए। इनमें दैनिक यांत्रिक झाड़ू (मैकेनाइज़्ड स्वीपिंग) और नियमित जल छिड़काव अथवा अनुमोदित धूल-दमन रसायनों के उपयोग के माध्यम से समयबद्ध धूल-नियंत्रण शामिल है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहाँ नियामक प्रतिबंधों के कारण पूर्ण कार्य आरंभ नहीं हो सकता, वहाँ खुले सड़क हिस्सों को अस्थायी रूप से पक्का किया जाए या दबाया जाए ताकि धूल का उत्सर्जन रोका जा सके। विद्यालय क्षेत्रों और बाज़ार इलाकों में पीक आवर्स के दौरान धूल-नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और यातायात पुलिस द्वारा साप्ताहिक संयुक्त निरीक्षण, जियो-टैग्ड रिपोर्टिंग तथा स्पष्ट अनुपालन समय-सीमाओं के साथ करने के निर्देश दिए गए।

प्रशासनिक एवं समन्वय संबंधी कमियों को दूर करने के लिए, अध्यक्ष ने विधायक कार्यालय के अंतर्गत रोहिणी डस्ट एक्शन सेल की स्थापना के निर्देश दिए, ताकि डीडीए, एमसीडी, डीपीसीसी और यातायात पुलिस के बीच समन्वित कार्यवाही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि एकीकृत रखरखाव और प्रवर्तन तंत्र के अभाव में खुले सड़क हिस्सों की उपेक्षा लंबे समय तक बनी रही है, जिसे संरचित अंतर-एजेंसी समन्वय और निगरानी के माध्यम से तत्काल सुधारा जाना चाहिए।

दीर्घकालिक और सतत समाधान के लिए, श्री गुप्ता ने रोहिणी की सभी शेष बिना पक्की या बार-बार क्षतिग्रस्त सड़कों के वॉल-टू-वॉल पक्कीकरण/कार्पेटिंग को शीघ्र पूरा करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्थायी कंधों (शोल्डर्स) और फुटपाथों के निर्माण, खाली खुले भूखंडों को हरित बफर या पक्के सामुदायिक स्थलों में परिवर्तित करने तथा विद्यालयों और उच्च यातायात वाले चौराहों के निकट स्थानीय कणीय पदार्थ निगरानी बिंदुओं की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वायु गुणवत्ता में वास्तविक और मापनीय सुधारों को ट्रैक किया जा सके।

निरीक्षण के समापन पर, अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रभावी वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए आकस्मिक कार्रवाई नहीं, बल्कि निरंतरता आवश्यक है, और जनस्वास्थ्य को नागरिक शासन के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि रोहिणी में इन उपायों के क्रियान्वयन की कड़ी निगरानी की जाएगी, समय-समय पर समीक्षा होगी और अंतर-एजेंसी जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए पर्यावरणीय स्थितियों तथा निवासियों की जीवन गुणवत्ता में ठोस सुधार लाया जाएगा।

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