चांदी ₹2,793 बढ़कर ₹1.88 लाख प्रति किलो के ऑल-टाइम हाई पर ,रुपये की ऐतिहासिक गिरावट

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नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025 । चांदी की कीमतों में ताजा उछाल ने घरेलू बाजार में हलचल बढ़ा दी है। एक ही दिन में ₹2,793 की बढ़त के साथ चांदी ₹1.88 लाख प्रति किलो के साथ अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह तेजी वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में मजबूती, निवेशकों के सुरक्षित पनाहगाह की ओर रुख और भारत में रुपये की कमजोरी के कारण आई है।

रुपया आज डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 90.47 पर आ गया है। इससे पहले रुपए ने 4 दिसंबर को 90.43 के स्तर पर ऑल टाइम लो बनाया था।

लगातार विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपए पर दबाव बनाया है। रुपया 2025 में अब तक 5% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.47 के लेवल पर पहुंच गया है।

रुपए में गिरावट से इम्पोर्ट करना महंगा होगा रुपए में गिरावट का मतलब है कि भारत के लिए चीजों का इम्पोर्ट महंगा होना है। इसके अलावा विदेश में घूमना और पढ़ना भी महंगा हो गया है।

मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी, तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाता था। अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 90.47 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इससे छात्रों के लिए फीस से लेकर रहना-खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी।

रुपए में गिरावट की तीन वजहें

  • US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया हैं, जो भारत की GDP ग्रोथ को 60-80 बेसिस पॉइंट्स गिरा सकता है और फिस्कल डेफिसिट बढ़ा सकता है। इससे निर्यात घट सकता है। विदेशी मुद्रा की आमद कम होती है। इस वजह से रुपया दबाव में है।
  • जुलाई 2025 से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने भारतीय एसेट्स में ₹1.55 लाख करोड़ से ज्यादा की बिक्री की है। इसकी वजहें US ट्रेड टैरिफ्स की चिंता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ गई है (बिक्री डॉलर में कन्वर्ट होती है), जो रुपए को नीचे धकेल रहा है।
  • तेल और सोने की कंपनियां हेजिंग के लिए डॉलर खरीद रही हैं। अन्य आयातक भी टैरिफ अनिश्चितता के कारण डॉलर स्टॉक कर रहे हैं। इससे रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है।

रुपया भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है, जिसने आयात होने वाली धातुओं को और महंगा कर दिया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट का सीधा असर बुलियन मार्केट पर पड़ा, जिससे जौहरी और निवेशकों दोनों के लिए लागत बढ़ी। आर्थिक अनिश्चितता, वैश्विक ब्याज दरों में संभावित बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव भी कीमतों में उछाल का प्रमुख कारण बने हैं।
चांदी के इस तेजी भरे दौर से औद्योगिक और आभूषण क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में चांदी की खपत बढ़ने के चलते मांग स्थिर बनी हुई है, जिससे भविष्य में भी ऊंचे दाम बने रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थिति निवेशकों को अल्पकालिक लाभ दे सकती है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान आगे की दिशा तय करेंगे।

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