गोवा अग्निकांड; क्लब मालिकों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू

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नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025 । गोवा के चर्चित अग्निकांड मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार क्लब मालिकों को भारत लाने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम घटना की गंभीरता, पीड़ितों को न्याय दिलाने और जिम्मेदार लोगों को कानूनी दायरे में लाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

गोवा के नाइट क्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ आग मामले में मुख्य आरोपी सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा को थाईलैंड से भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। थाईलैंड पुलिस ने गुरुवार (11 दिसंबर) को फुकेट में दोनों भाइयों को हिरासत में लिया था।

थाई पुलिस अब दोनों को बैंकॉक लेकर जा रही है। वहां सुवर्णभूमि एयरपोर्ट पर भारतीय एजेंसियां उन्हें अपनी कस्टडी में लेंगी। इसके बाद उन्हें सुआन फू इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर ले जाया जाएगा। पासपोर्ट रद्द होने के कारण भारतीय दूतावास उन्हें इमरजेंसी ट्रैवल सर्टिफिकेट जारी करेगा।

चूंकि, थाईलैंड से गोवा के लिए सीधी उड़ान नहीं है, इसलिए लूथरा ब्रदर्स को बैंकॉक से पहले दिल्ली, फिर गोवा ले जाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 4 दिन लगेंगे। सोमवार तक दोनों भाइयों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है। दिल्ली पहुंचते ही गोवा पुलिस दोनों को हिरासत में लेगी।

इधर, लूथरा ब्रदर्स को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ और गौरव, बर्च क्लब के अलावा अन्य 42 कंपनियों से भी जुड़े हैं, जिनमें कई सिर्फ कागज पर मौजूद हैं। ये सभी कंपनियां दिल्ली में एक ही पते (2590, ग्राउंड फ्लोर, हडसन लाइन, नार्थ वेस्ट दिल्ली) पर रजिस्टर्ड हैं।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित देशों से संपर्क कर औपचारिक प्रत्यर्पण दस्तावेज भेजे जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लीगल कोऑपरेशन, इंटरपोल नोटिस और इमिग्रेशन आधारित प्रतिबंध इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अधिकारियों का मानना है कि क्लब मालिकों की भारत वापसी से जांच में मौजूद कई सवालों के जवाब मिल सकेंगे, जैसे– सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण, अग्निशमन उपकरणों की गैर-उपलब्धता और क्लब में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों की मौजूदगी।

पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहे थे। क्लब मालिकों की वापसी से अब जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी प्रक्रिया लागू होने की उम्मीद है। सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि इस तरह के हादसों में किसी को भी राजनीतिक या कारोबारी संरक्षण नहीं मिलेगा।
यह केस गोवा के पर्यटन और नाइटलाइफ़ उद्योग के लिए एक बड़ा सबक है, जहां सुरक्षा मानकों की सख्त निगरानी और लाइसेंसिंग सिस्टम में सुधार की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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