पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद शिलान्यास के पोस्टर लगे

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कोलकाता, 26  नवम्बर 2025 । पश्चिम बंगाल में विभिन्न ज़िलों में अचानक ‘बाबरी मस्जिद शिलान्यास’ के पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। 1992 की अयोध्या घटना से जुड़ा यह मुद्दा खुद में अत्यंत संवेदनशील है, और अब इसके पोस्टरों के ज़रिये प्रदेश का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है।

ये पोस्टर किस संगठन ने लगाए — इस पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इनमें से कई पोस्टर हटा दिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इन पोस्टरों की तस्वीरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे राजनीतिक दल एक-दूसरे पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के आरोप लगा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में मंगलवार देर रात बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के पोस्टर लगाए गए। इन पर लिखा है- 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह होगा। तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर को आयोजनकर्ता बताया गया है।

खुद कबीर ने मंगलवार को कहा, हम 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। तीन साल में इसका निर्माण पूरा होगा। कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता शामिल होंगे।

अयोध्या में विवादित ढांचा 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने ध्वस्त कर दिया था। अगले महीने बाबरी विध्वंस के 33 साल पूरे हो जाएंगे। TMC विधायक का कहना है कि इसी मौके पर यह आयोजन किया जाएगा।

TMC विधायक का यह बयान तब सामने आया है जब मंगलवार को अयोध्या में PM मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण का मतलब है मंदिर अब पूर्ण हो गया। 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

भाजपा बोली- बांग्लादेश की नींव रख रही, कांग्रेस का समर्थन

  • भाजपा ने इसकी कड़ी आलोचना की है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि TMC पश्चिम बंगाल में मस्जिद नहीं, बल्कि बांग्लादेश की आधारशिला रख रही है। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि ममता बनर्जी सरकार बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के समर्थन पर टिकी है। जिस तरह TMC हिंदुओं की लाशों पर राजनीति कर रही है, वह लंबे समय तक नहीं चलेगा।
  • कांग्रेस नेता उदित राज ने TMC विधायक कबीर का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- अगर मंदिर का शिलान्यास हो सकता है तो मस्जिद का क्यों नहीं? विरोध करने वाले बिना वजह विवाद खड़ा कर रहे हैं। यह धार्मिक स्वतंत्रता है।
  • महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा है कि मस्जिद बनाना ठीक है, लेकिन खास तौर पर बाबरी मस्जिद ही क्यों? जो विवाद पहले ही सुलझ चुका है, उसे राजनीतिक फायदे के लिए फिर से खोला जा रहा है। हमारा रिश्ता बाबर से नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज से है।
  • बीजेपी नेता और बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेन्दु अधिकारी ने कहा कि वह यह सब सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए कर रहे हैं।चुनाव पास आ रहे हैं। बेचारे मुसलमान TMC को छोड़ रहे हैं। जैसे 2021 में उन्होंने CAA को NRC कहकर सभी मुसलमानों को एक किया था, इस बार वे बाबरी मस्जिद के नाम पर कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद शिलान्यास पोस्टर विवाद यह संकेत देता है कि धार्मिक प्रतीकों और ऐतिहासिक विवादों का इस्तेमाल आज भी राजनीतिक रणनीतियों में किया जाता है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और सुरक्षा पर किस हद तक असर डालता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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