पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और हरित आर्थिक विकास, ये भविष्य की नैतिक त्रिमूर्ति हैं” — विजेन्द्र गुप्ता

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  • विजेंद्र गुप्ता ने बारबाडोस में आयोजित 68वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस की दो कार्यशालाओं में लिया भाग

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2025 । दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि “जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानवता और विकास दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है”। उन्होंने कहा कि “थोड़ा-सा तापमान बढ़ना भी भारी वर्षा, बाढ़ और ग्लेशियरों के पिघलने जैसी प्राकृतिक आपदाओं को जन्म दे सकता है।” गुप्ता ने यह बात बारबाडोस के ब्रिजटाउन में आयोजित 68वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस (सीपीसी) में हुई दो कार्यशालाओं में भाग लेते हुए कही।

गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक मानवीय संकट भी है, जो आजीविका, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे जिम्मेदारी और समानता की भावना के साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करें।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “यह केवल पृथ्वी की रक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि मानव गरिमा और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न है।” उन्होंने जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ने और पर्यावरण संरक्षण को नीति निर्माण का मुख्य हिस्सा बनाने पर बल दिया।

गुप्ता ने दिल्ली विधानसभा की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि “सार्वजनिक संस्थाएं भी पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकती हैं और उदाहरण प्रस्तुत कर सकती हैं।”

दूसरी कार्यशाला में “राष्ट्रीय संसद बनाम प्रांतीय व क्षेत्रीय विधानसभाएं — शक्तियों के पृथक्करण द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाना” विषय पर बोलते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति उसके संतुलन और जवाबदेही में निहित है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि विश्वास का एक अनुबंध है — जहां सत्ता संयम से प्रयोग की जाती है, जिम्मेदारी से साझा की जाती है और लगातार जवाबदेह रहती है।”

गुप्ता ने कहा कि सत्ता का केंद्रीकरण लोकतंत्र को कमजोर करता है, जबकि विकेंद्रीकरण उसे सशक्त बनाता है। उन्होंने भारत के संघीय ढांचे को सहकारी और सहभागी शासन का सशक्त उदाहरण बताया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “यदि संसद राष्ट्र की इच्छा का प्रतीक है, तो राज्य विधानसभाएं जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती हैं।”

गुप्ता ने कहा कि संस्थाओं के बीच रचनात्मक तनाव लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रतीक है और सच्चा लोकतंत्र एकता के उद्देश्य से संचालित होता है, न कि शक्ति की एकरूपता से।

सम्मेलन के दौरान अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस के महासचिव स्टीफन ट्विग से मुलाकात की और उन्हें ‘Modi@20’ पुस्तक भेंट की।

गुप्ता ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक अनुभव, जो विविधता, संवाद और अनुशासन पर आधारित है, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत है।

अपने संबोधन के समापन पर गुप्ता ने कहा,“लोकतंत्र कोई समाप्त उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जीवंत वादा है। इसका स्थायित्व संस्थाओं की मजबूती, नेताओं की विनम्रता और नागरिकों के विश्वास पर निर्भर करता है।”

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