समाज में सत्य, धर्म और सेवा की भावना जागृत करना ही मूल लक्ष्य है – आकाश राजेश गहलोत

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  • रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है – जय प्रकाश
  •  द्वारका श्री रामलीला में दशरथ केकैयी संवाद से लेकर केवट प्रसंग तक दर्शकों की आंखें हुईं नम

नई दिल्ली । 26 सितम्बर 25 । संस्कृति, आस्था और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही द्वारका श्री रामलीला सोसायटी (पंजी.) द्वारा आयोजित भव्य रामलीला मंचन का आज पाँचवाँ दिन श्रद्धा और भावनाओं से सरोबार रहा। इस अद्भुत आयोजन के चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत के नेतृत्व में मंचन का प्रत्येक दिवस दर्शकों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन संदेशों से जोड़ रहा है।
आज की लीला का मंचन अत्यंत भावनात्मक और हृदयस्पर्शी रहा, जिसमें “दशरथ-केकैयी संवाद”, “राम वनवास”, तथा “केवट प्रसंग” जैसे प्रसंगों ने सभी उपस्थित जनों की आंखों को नम कर दिया। श्रीराम के वनवास जाने का प्रसंग दर्शकों के लिए एक ऐसा क्षण बना जब पूरे मैदान में सन्नाटा और भावनाओं की लहरें एक साथ उमड़ पड़ीं।
इस अवसर पर मंच पर बतौर मुख्य अतिथि पधारे


✨ अशोक चंद्र
एमडी पंजाब नेशनल बैंक
✨ जय प्रकाश (जेपीजी), पूर्व महापौर, दिल्ली नगर निगम
ने आयोजन समिति के प्रति अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं और द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की इस सांस्कृतिक धरोहर को दिल्ली की धार्मिक चेतना का केंद्र बताया।
दोनों अतिथियों ने मंचन के पश्चात कहा कि,
“रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को धर्म, कर्तव्य और मर्यादा का मार्ग दिखाते हैं। द्वारका की रामलीला जिस भव्यता और अनुशासन से संपन्न हो रही है, वह निश्चय ही अनुकरणीय है।”
आकाश राजेश गहलोत ने अपने संबोधन में कहा —
“हमारा उद्देश्य केवल लीला मंचन नहीं, बल्कि हर हृदय में श्रीराम के आदर्शों की ज्योति प्रज्वलित करना है। समाज में सत्य, धर्म और सेवा की भावना जागृत करना ही इस आयोजन का मूल लक्ष्य है।”
दर्शकों ने भावविभोर होकर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय कर दिया। नन्हें बालकों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, सभी ने इस भावनात्मक मंचन का आनंद लिया और श्रीराम के जीवन आदर्शों से प्रेरणा ग्रहण की।
आयोजन समिति की टीम ने मंचन के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आने वाले दिनों में भरत मिलाप, सीता स्वयंवर, सुग्रीव मैत्री जैसे लोकप्रिय प्रसंगों का भव्य मंचन किया जाएगा।
द्वारका श्री रामलीला 2025 का यह उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस जीवंत परंपरा का उत्सव है, जो पीढ़ियों से समाज में मर्यादा, धर्म और प्रेम का संदेश देती आ रही है।

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