अब दिल्ली के बच्चे भी पहुंचेंगे बड़े पदों पर, चलाएंगें देश – रेखा गुप्ता

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• सीएम का दिल्ली के अभिभावकों को आश्वासन, बच्चों को मिलेगी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा

•प्राइवेट स्कूल दिल्ली की जरूरत लेकिन सिस्टम मे पारदर्शिता जरूरी

नई दिल्ली । 09 अगस्त 2025 । मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि अब उनके बच्चे राजधानी में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षाा प्राप्त करेंगे। अब वे दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर अपने भविष्य को उज्ज्वाल करेंगे और बड़े पदों पर पहुंचकर देश चलाने में अपना योगदान देंगे। मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि प्राइवेट स्कूल देश की राजधानी की जरूरत है लेकिन हमने ऐसा प्रावधान कर दिया है कि गरीब का बच्चा भी वहां शिक्षा प्राप्त कर जीवन की राह आसान बना सके।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बयान मे जानकारी दी कि शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में उनकी सरकार ने ऐतिहासिक ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक 2025’ को बहुमत से पारित कर दिया है। विधेयक दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, न्याय और जवाबदेही की नई नींव रखेगा और निजी स्कूलों की वर्षों से चली आ रही मनमानी पर निर्णायक प्रहार करेगा। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल दिल्ली की हकीकत बन चुके हैं, क्योंकि अब तक की सरकारें पर्याप्त गुणवत्ता वाले सरकारी स्कूल नहीं बना सकीं। दिल्ली में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या कोई अचानक की घटना नहीं है, बल्कि यह विपक्ष के वर्षों तक गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा देने में विफल रहने का परिणाम है। पूर्व सरकारों ने दिल्ली की जनता को अच्छी शिक्षा नहीं दी, इसलिए अभिभावकों को निजी स्कूलों की ओर रुख करना पड़ा। हमारा बस यही उद्देश्य है कि राजधानी के हर वर्ग का बच्चा इन स्कूलों मे शिक्षा प्राप्त करे और अभिभावकों को स्कूल फीस का गहरा दंश न झेलना पड़े। हमारी सरकार ने शिक्षाा विशेषज्ञों, अभिभावकों आदि से विचार विमर्श कर इस विधेयक को पारित किया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली में लगभग 1,733 प्राइवेट स्कूल हैं, इनमें से करीब 300 को डीडीए ने सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई है। लैंड क्लॉज़ का मामला यह है कि इस जमीन को दिल्ली सरकार ने नहीं दिया है। लीज़ की शर्तों के अनुसार अगर कोई स्कूल उन्हें तोड़ता है, तो कार्रवाई का अधिकार डीडीए के पास है। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग का निदेशक केवल डीडीए को पत्र लिख सकता है। इससे आगे वह कुछ नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री के अनुसार शिक्षा विधेयक में डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन को एसडीएम जैसी शक्तियां दी गई हैं। नए नियमों के अनुसार उसे स्कूल के खाते सीज़ करने, चल-अचल संपत्ति अटैच करने तक की शक्ति प्रदान की गई है। हमारे विधेयक की परिधि में डीडीए वाले 300 स्कूल नहीं बल्कि सभी 1,733 स्कूल हैं। इनमें से जो भी मनमानी फीस का सिस्टम लागू करेगा, दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पूरी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता से इस विधेयक के हर प्रावधान को तैयार कराया गया है, जिसमें अभिभावकों का हित केंद्र में है। सरकार का दृष्टिकोण संतुलित है, न तो स्कूलों पर अराजक दबाव और न ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ। मुख्यमंत्री के अनुसार उन्होंने स्वयं विधेयक का मसौदा तैयार करने से लेकर हर बैठक में भाग लेकर यह सुनिश्चित किया कि अभिभावकों का हित ही इसका मुख्य उद्देश्य रहे और किसी भी तरह से इसे कमजोर न होने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार अपनी शिक्षा क्रांति की बड़ी बड़ी बातें करती रहीं, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में उनके भ्रष्टाचार जगजाहिर हैं। स्कूलों के कमरे बनाने में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच तो चल ही रही है, इसके अलावा स्कूलों की अधूरी इमारतें, अटकी हुई शिक्षक भर्ती और भ्रष्टाचार से सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था ही उनकी असली पहचान बन गई थी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से पूछा कि अगर आप और कांग्रेस इतने ही शिक्षा हितैषी थे, तो 27 साल में फीस नियंत्रण का कोई कानूनी सिस्टम क्यों नहीं बनाया? क्योंकि उसे बनाने में वोट नहीं, प्रचार मिलता है और प्रचार ही आपकी असली राजनीति है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि शिक्षा विधेयक के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं जैसे फीस निर्धारण में पारदर्शिता, अभिभावकों की सशक्त भागीदारी और फीस वृद्धि में अभिभावकों को मिला वीटो पावर। अब कोई निजी स्कूल अपनी मर्ज़ी से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। फीस तय करने के लिए स्कूलों को लोकेशन, सुविधाएं, खर्च और शिक्षण स्तर जैसी विस्तृत जानकारी देनी होगी। बिना अनुमति फीस बढ़ाने पर 1 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा और अतिरिक्त वसूली लौटाने में देरी पर यह दोगुना होगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह विधेयक दिल्ली के बच्चों के सपनों की सुरक्षा है। अब कोई उनकी उम्मीदों की कीमत वसूल नहीं सकेगा। शिक्षा से मुनाफाखोरी का साया हटाकर एक नई दिल्ली गढ़ी जाएगी, जो झूठे नारों से नहीं, बल्कि सच्चे बदलाव से पहचानी जाएगी। साथ ही यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि गरीबी के कारण कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

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