दिल्ली सरकार स्कूलों के नाम दिल्ली के शहीदों के नाम पर रखेगी — आशीष सूद

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आशीष सूद ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शिवाजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम मे शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

नई दिल्ली । 26 जुलाई 25 । दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज में आयोजित कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में कॉलेज के प्रिंसिपल, शहीद कैप्टन सुमित रॉय की माताजी स्वप्ना रॉय, शिक्षक ओर छात्र भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मंत्री ने शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे शहीद कैप्टन सुमित रॉय, कैप्टन हनीफ उदीन तथा कैप्टन अनुज नैय्यर को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उपस्थित सभी छात्रों का अभिवादन किया।

इस अवसर पर सूद ने कहा कि कि शहीद भगत सिंह को याद करना सबको अच्छा लगता है। सब भगत सिंह से प्रेरणा लेना चाहते है। मगर भगत सिंह मेरे घर में जन्मे यह कोई नही चाहता। हर कोई चाहता है कि समाज में सब कुछ अच्छा हो और हमारी सीमाएं सुरक्षित रहें। मगर सीमा की सुरक्षा में सुप्रीम सैक्रिफाइस देने वाला पड़ोसी के घर से हो। फिर भी इस देश की माटी में ऐसा खून है कि हमारी नई जनरेशंस फौज में भर्ती होना चाहती हैं। युवा पीढ़ी में वो जज्बा है जो देश हित को सर्वोपरि मानती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय परिवार का यदि एक व्यक्ति शहीद होता है तो उसकी पीढ़ी का अगला व्यक्ति पहले से ही फौज में जाने के लिए तैयार रहता है। लोग फौज में जाते हैं क्योंकि उनके मन में इस देश की सेवा करने का जज़्बा होता है।
उन्होंने यह भी कहा की कैप्टन हनीफ उद्दीन, उम्र 21 साल, कैप्टन सुमित राय, उम्र सिर्फ 21 साल, कैप्टन अनुज नैय्यर, उम्र 24 साल जैसे युवाओं ने अपनी अल्प आयु में दुश्मनों से लड़कर लोहा लिया। असाधारण वीरता और त्वरित कारवाइ ने उस मोर्चे पर विजय दिलाई। शरीर पर गहरे ज़ख्मों के बावजूद, अपनी आखिरी सांस तक उन्होंने एक के बाद एक दुश्मन के बंकरों को नेस्तनाबूत किया और तिरंगे को चोटीयों पर लहराने का मार्ग प्रशस्त किया। उनका बलिदान लीडरशिप और वीरता को देश सलाम करता है।

कारगिल के शहीदों को याद करते हुए सूद ने कहा कि जैसा देश के प्रति समर्पित जीवन हमारे उन रणबांकुर युवाओं ने हमारे नौजवानों ने जिया वह हम सब के लिए प्रेरणास्रोत है। मात्र 20- से 25 साल के युवा फौजियों ने देश के लिए जो किया था वह अदभुत है। मैं दिल से ये मानता हूं कि कुछ ना कुछ ज़रूर उन व्यक्तियों के अंदर होता है जिसके कारण वे लोग अपना जीवन इस देश के ऊपर कुर्बान कर देते हैं।

सूद ने आगे कहा कि इन शहीदों के अलावा और न जाने कितने फौजियों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन से लोहा लिया। ये सब वो लोग हैं जिन्होंने हमारे स्वर्णिम कल के लिए अपना आज खपा दिया।

सूद ने यह भी कहा कि हम सबको बॉर्डर पर जाने की जरूरत नहीं है । हम में से हर व्यक्ति को बॉर्डर पर जाकर दुश्मन का सामना नही करना बल्कि देश हित में ऐसे काम करने है जिनसे आने वाली पीढ़ियां हमे सदियों तक याद रख सकें। मैं तो यहाँ तक मानता हूँ कि अपने आसपास को साफ रखना और ये निर्णय करना कि मैं कोई गलत काम नहीं करूँगा, देश के ट्रैफिक सिग्नल्स की पालना करना, देश के अंदर बेहतर सिविक सेंस के साथ अच्छे नागरिक बनके रहना, इस देश और समाज के लिए यहाँ के पर्यावरण की रक्षा करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना भी एक प्रकार की देशभक्ति ही है। ये भी देश के लिए बहुत बड़ा काम है जिसको हम सबको करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट करता हूं जिन्होंने पिछले 10 वर्षों में पहली बार हमारे देश के शहीदों के नाम का भी एक मेमोरियल बनवाया है। वॉर मेमोरियल पर हर दिन शाम के समय एक शहीद के परिवार को बुला कर उसको सम्मानित किया जाता है।

सूद ने आगे कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार दिल्ली में रहने वाले, दिल्ली के पढ़े हुए हर शहीद के साथ, उनके परिवार के साथ, उनके भाई बंधुओं के साथ, पूरी शिद्दत के साथ, पूरे सम्मान के साथ खड़ी है। मैं, उन सबको मुख्यमंत्री जी की ओर से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हम सब मिलकर उनके सपनों का वो भारत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे जिसके लिए उन्होंने शहादत दी। हम उन शहादत को जीने की कोशिश करेंगे।

शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि हम यह भी संभावना तलाश करेंगे कि दिल्ली के अच्छे स्कूलों के नाम दिल्ली के शहीदों के नाम पर हों। इस तरह शहीदों से लोग प्रेरणा लें, बच्चे प्रेरणा लें, और देश के लिए अच्छा काम कर पाएँ।

उन्होंने कहा कि शिवाजी कॉलेज के प्रिंसिपल, कॉलेज की फ़ैकल्टी, कॉलेज के स्टूडेंट्स उन सबको साधुवाद देता हूं कि उन्होंने एक अच्छा विचार सोचा कि कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने कॉलेज के शहीदों को याद करे। साथ ही इस मौके पर देश के बाकी शहीदों को भी हम याद करना न भूले जिन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दे दिया।

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