‘भारत को वैश्विक ज्ञान नेता बनाना है तो डॉ. आशुतोष मुखर्जी जैसे संस्थापक दूरदर्शियों के विचार अपनाने होंगे’: जेपी नड्डा

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नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को कहा कि भारत की वैश्विक ज्ञान नेता बनने की आकांक्षा डॉ. आशुतोष मुखर्जी जैसे संस्था-निर्माताओं के विजन पर आधारित होनी चाहिए। वे दिल्ली विधानसभा द्वारा डॉ. आशुतोष मुखर्जी की 162वीं जयंती पर प्रकाशित पुस्तक ‘द कलेक्टेड स्पीचेज ऑफ बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

‘भाषण बौद्धिक रिचार्ज का माध्यम’

नड्डा ने कहा, “जैसे मोबाइल फोन को हर दिन रिचार्ज करना पड़ता है, वैसे ही सार्वजनिक जीवन को भी निरंतर बौद्धिक नवीनीकरण की जरूरत होती है। डॉ. आशुतोष मुखर्जी के भाषण संवैधानिक मूल्यों, तर्कसंगत बहस और राष्ट्रवाद की गहरी भावना से हमारे मस्तिष्क को रिचार्ज करते रहते हैं।” उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने नागरिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक जवाबदेही और विश्वविद्यालय स्वायत्तता की वकालत तर्कसंगत संवैधानिक विमर्श से की, न कि भावनात्मक नारों से।

सीएम ने शिक्षा नीति से जोड़ा विजन

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “महान व्यक्तित्वों का जीवन इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, उन्हें हर नई पीढ़ी को प्रेरित करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी सिर्फ विधिवेत्ता या शिक्षाविद् नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से जुड़े दूरदर्शी थे। सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर उन्हीं सिद्धांतों को दर्शाता है जिनकी वकालत डॉ. मुखर्जी ने दशकों पहले की थी।

स्पीकर ने बताया बौद्धिक पुनर्जागरण का शिल्पी

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने डॉ. आशुतोष मुखर्जी को भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण का शिल्पी बताया। उन्होंने कहा, “डॉ. मुखर्जी ने दिखाया कि राष्ट्र की असली ताकत निडर छात्रवृत्ति, शैक्षणिक उत्कृष्टता और योग्यता पर आधारित संस्थानों में है।” उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. मुखर्जी ने औपनिवेशिक शासन में भी शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता की रक्षा की और सरकारी विरोध के बावजूद सर सीवी रमन और प्रो. मेघनाद साहा जैसे विद्वानों को प्रोत्साहित किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे छात्रों के साथ वे महत्वपूर्ण क्षणों में खड़े रहे।

शिक्षा मंत्री ने बताया राष्ट्र निर्माण की नींव

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, “डॉ. आशुतोष मुखर्जी ने दिखाया कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव है। उनका जीवन हमें छात्रवृत्ति, चरित्र और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पर आधारित संस्थान बनाने की प्रेरणा देता है।”

समारोह में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज कुमार सिंह, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, सांसद, विधायक, शिक्षाविद् और विद्वान शामिल हुए। इस दौरान पद्म भूषण अनुपम खेर द्वारा वर्णित दिल्ली विधानसभा और डॉ. मुखर्जी के भाषणों पर डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।

डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि हर विधायिका का दायित्व है कि वह संवैधानिक रिकॉर्ड के साथ-साथ राष्ट्र के लोकतांत्रिक विकास को आकार देने वाले विचारों को भी संरक्षित करे।

कौन थे डॉ. आशुतोष मुखर्जी

डॉ. आशुतोष मुखर्जी (1864-1924) प्रख्यात शिक्षाविद्, विधिवेत्ता, इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य, कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।

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