लखनऊ, 13 अप्रैल 2026 । उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मानदेय की प्रतीक्षा कर रहे लगभग 1 लाख शिक्षाप्रेरकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उनके बकाया मानदेय के भुगतान को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद जगी है।
राज्य सरकार साक्षर भारत मिशन के तहत लंबित पड़े 400 करोड़ रुपये से अधिक मानदेय का भुगतान जल्द कर सकती है। सूत्रों की मानें तो साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं विभाग के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के 60 जिलों में अधिकारियों को पात्र शिक्षाप्रेरकों का सत्यापन कर विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में डायट के प्राचार्यों, बीएसए और डीआईओएस को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
शिक्षाप्रेरक, जो साक्षरता और शिक्षा से जुड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, पिछले काफी समय से अपने मानदेय के भुगतान को लेकर परेशान थे। कई बार उन्होंने सरकार के सामने अपनी मांगें भी रखीं, लेकिन अब जाकर इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। आदेश जारी होने के बाद संबंधित विभागों को जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के इस फैसले को शिक्षाप्रेरकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद मिलने वाला यह मानदेय उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता लाने में मदद करेगा। साथ ही इससे शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत इन कर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा, जिससे वे और अधिक समर्पण के साथ अपने कार्यों को निभा सकेंगे।
इस निर्णय से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है। शिक्षाप्रेरकों की भूमिका खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बेहद अहम होती है, जहां वे लोगों को साक्षर बनाने और जागरूकता फैलाने में योगदान देते हैं।
हालांकि, कुछ शिक्षाप्रेरकों का कहना है कि भविष्य में मानदेय का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद, फिलहाल इस आदेश ने उनके बीच खुशी और संतोष का माहौल बना दिया है।
