नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026 । अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। लंबे समय से जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन हालिया समझौते के बाद बाजार में राहत का माहौल बना है।
अमेरिका-ईरान जंग में 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 15% सस्ता हुआ है। बुधवार को दाम करीब 15 डॉलर गिरकर 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था।
जंग के दौरान दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। तब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल सस्ता होने से अब यह आशंकाएं खत्म हो गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता घटती है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव कम होता है। यही वजह है कि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
इस गिरावट का सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा। भारत को सस्ते कच्चे तेल का फायदा मिलेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता या कमी आ सकती है। साथ ही महंगाई दर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है, तो तेल की कीमतों में और गिरावट संभव है। हालांकि, वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर है और आने वाले समय में इसका असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई दे सकता है।
