CAPF Bill पर सियासी घमासान: राहुल गांधी का आरोप—जवानों के मनोबल से खिलवाड़,

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नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2026 । केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) से जुड़े प्रस्तावित बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस बिल पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे जवानों के मनोबल को कमजोर करने वाली साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि जो जवान देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, उनके अधिकारों और सुविधाओं को सीमित करने वाला कोई भी कदम न केवल अनुचित है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।

 उन्होंने एक वीडियो जारी कर यह दावा भी किया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को उस दिन लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए लाया गया है, जिस दिन वह असम के चुनावी दौरे पर हैं। राहुल का कहना है कि उन्होंने बुधवार को सरकार से आग्रह किया था कि वह इस विधेयक पर सदन में बोलना चाहते हैं, ऐसे में इसे पारित करवाने की तिथि थोड़ा आगे-पीछे कर दी जाए, लेकिन सरकार नहीं चाहती कि वह इस विषय पर बोलें।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए CAPF जवानों की कार्य स्थितियों और अधिकारों में कटौती करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से ही लंबे समय तक ड्यूटी, सीमित छुट्टियां और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे जवानों के लिए यह बिल और अधिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है। उनका मानना है कि सरकार को जवानों के कल्याण, बेहतर वेतन, स्वास्थ्य सुविधाओं और परिवारिक समर्थन पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे कानून लाने चाहिए जो उनकी स्थिति को और कमजोर करें।

दूसरी ओर, सरकार का पक्ष यह है कि CAPF से जुड़े सुधारों का उद्देश्य बलों को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जवाबदेह बनाना है। सरकार का दावा है कि इस बिल से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि, विपक्ष इस तर्क को खारिज करते हुए इसे “जवान विरोधी” कदम बता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि CAPF जैसे महत्वपूर्ण बलों से जुड़े किसी भी कानून पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है। देश की आंतरिक सुरक्षा का बड़ा हिस्सा इन बलों पर निर्भर करता है, इसलिए उनकी संतुष्टि और मनोबल बनाए रखना बेहद अहम है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस बिल पर क्या बदलाव होते हैं और सरकार विपक्ष की चिंताओं को किस तरह संबोधित करती है।

यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है, क्योंकि जवानों से जुड़े सवाल सीधे तौर पर जनता की भावनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होते हैं।

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