अंगोला से गैस खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां

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नई दिल्ली, 30  मार्च 2026 । भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय कंपनियां अफ्रीकी देश Angola से प्राकृतिक गैस खरीदने की तैयारी कर रही हैं। यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अहम मानी जा रही है।

भारत में गैस की कमी की वजह से सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से सप्लाई का ऑप्शन तलाश रही हैं।

इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए बात कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ लंबी अवधि के समझौते (टर्म कॉन्ट्रैक्ट) करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और सरकार से सरकार के स्तर पर भी चर्चा जारी है।

यह हालात इसलिए बने हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। यह रास्ता दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बहुत अहम माना जाता है। इसके बंद होने से भारत समेत कई देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय ऊर्जा कंपनियां दीर्घकालिक समझौते (Long-term contracts) के जरिए गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विचार कर रही हैं। इससे न केवल स्थिर सप्लाई मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से भी कुछ हद तक बचाव हो सकेगा।

India की बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए सरकार और कंपनियां नए स्रोतों की तलाश में हैं। अंगोला, जो तेल और गैस संसाधनों से समृद्ध है, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। इससे मध्य पूर्व पर निर्भरता भी कम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत को ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता मिलेगी और उद्योगों के लिए गैस की उपलब्धता बेहतर होगी। साथ ही, यह दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।

हालांकि, इस तरह के समझौतों में कीमत, लॉजिस्टिक्स और दीर्घकालिक आपूर्ति की शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं, जिन पर अभी बातचीत जारी है।

कुल मिलाकर, अंगोला से गैस खरीदने की योजना भारत की ऊर्जा रणनीति का एक अहम हिस्सा बन सकती है, जो भविष्य में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।

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