नई दिल्ली , देश में बढ़ते ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने करीब 300 अवैध बेटिंग वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है, जो लंबे समय से गैरकानूनी तरीके से सट्टा संचालन में लिप्त थे।
सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 वेबसाइट्स-एप्स को ब्लॉक किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब तक कुल 8400 ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया जा चुका है। इनमें से करीब 4900 वेबसाइट्स ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद ब्लॉक की गई हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है, वे मुख्य रूप से अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे। इनके जरिए बड़े स्तर पर अवैध लेनदेन और जुए को बढ़ावा मिल रहा था। इसे रोकने के लिए आईटी एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।
ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद इस तरह के प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई में तेजी आई है। सरकार का दावा है कि यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म बिना किसी वैध लाइसेंस के काम कर रहे थे और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। इनमें कई विदेशी प्लेटफॉर्म भी शामिल थे, जो भारतीय यूजर्स को टारगेट कर रहे थे और भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन रहे थे।
सरकार का कहना है कि इन वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए न केवल आर्थिक अपराध बढ़ रहे थे, बल्कि युवाओं में ऑनलाइन जुए की लत भी तेजी से फैल रही थी। इसके अलावा, इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड जैसे गंभीर अपराधों की आशंका भी जताई जा रही थी।
इस कार्रवाई को अंजाम देने में विभिन्न एजेंसियों और मंत्रालयों के बीच समन्वय किया गया। तकनीकी जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर इन प्लेटफॉर्म्स की पहचान की गई और फिर उन्हें ब्लॉक किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में अहम है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स बार-बार नए नामों से सामने आ सकते हैं, इसलिए निरंतर निगरानी और सख्त नियमों की जरूरत बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, सरकार की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि ऑनलाइन जुए और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है।
