ईरान पर ट्रम्प का बड़ा बयान: सुप्रीम लीडर के चुनाव में अमेरिका की भूमिका जरूरी

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तेल अवीव/तेहरान, 06 मार्च 2026 । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान में अगर भविष्य में नया सुप्रीम लीडर चुना जाता है तो उस प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान को उनके बिना नया सुप्रीम लीडर नहीं चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए नेता के चयन में अमेरिका की भूमिका जरूरी है और बिना अमेरिका की भागीदारी के ऐसा करना वक्त की बर्बादी होगी।

एक्सिओस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि ईरान अगर अमेरिका को शामिल किए बिना नया सुप्रीम लीडर चुनता है तो इसका कोई मतलब नहीं होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नया नेता भी पुराने नेतृत्व की नीतियां जारी रखता है तो अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले वर्षों में फिर टकराव हो सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ऐसा नेता चाहता है जो ईरान में शांति और स्थिरता ला सके।

ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बाद नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दुनिया की बड़ी शक्तियों की राय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि ईरान की राजनीतिक स्थिरता का असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ता है, इसलिए इस तरह के बड़े फैसले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका अहम हो सकती है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका की भागीदारी से ईरान में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ेगी। हालांकि उनके इस बयान को लेकर कई विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं और इसे ईरान के आंतरिक मामलों में दखल की तरह देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है, जिसके पास सेना, न्यायपालिका और प्रमुख नीतिगत फैसलों पर अंतिम अधिकार होता है। मौजूदा समय में अली खामेनेई लंबे समय से इस पद पर बने हुए हैं और उनके बाद उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे लेकर समय-समय पर अटकलें लगती रहती हैं।

ट्रम्प के इस बयान के बाद ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।

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