आरोप- बांग्लादेश सरकार ने डिफाल्टर को सेंट्रल बैंक गवर्नर बनाया

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ढाका, 27 फ़रवरी 2026 । बांग्लादेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने कथित रूप से एक वित्तीय डिफाल्टर को देश के केंद्रीय बैंक का गवर्नर नियुक्त कर दिया है। यह मामला सीधे तौर पर Bangladesh Bank की साख और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा माना जा रहा है।

विपक्ष का दावा है कि नए नियुक्त गवर्नर पर पहले से वित्तीय अनियमितताओं और लोन डिफॉल्ट से जुड़े आरोप रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे व्यक्ति को केंद्रीय बैंक जैसे संवेदनशील संस्थान की जिम्मेदारी देना बैंकिंग प्रणाली के लिए जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए खारिज किया गया है।

सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि नियुक्ति पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और उम्मीदवार का बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उनका दावा है कि डिफॉल्ट के आरोप या तो पुराने मामलों से जुड़े हैं या कानूनी रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता और पेशेवर क्षमता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

बांग्लादेश में सेंट्रल बैंक के नए गवर्नर की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि तारिक रहमान की सरकार ने एक डिफाल्टर को कारोबारी को सेंट्रल बैंक गवर्नर बना दिया है, जो देश में भीड़तंत्र की शुरुआत जैसा है।

बांग्लादेश बैंक के नए गवर्नर के रूप में मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया। जमात ए इस्लामी के प्रमुख और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने कहा कि यह फैसला पीएम की शह पर लिया गया है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने अहसान हबीब मंसूर का कार्यकाल अचानक खत्म कर दिया था, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था।

मंसूर ने कहा कि उन्होंने न इस्तीफा दिया और न ही उन्हें हटाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना मिली। उन्हें यह खबर मीडिया के जरिए पता चली।

विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की साख निवेशकों के विश्वास से सीधे जुड़ी होती है। ऐसे विवाद से विदेशी निवेश, मुद्रा स्थिरता और बैंकिंग सुधारों पर असर पड़ सकता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पहले से वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में केंद्रीय बैंक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत स्पष्टीकरण देगी या किसी प्रकार की जांच की घोषणा करेगी। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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