नई दिल्ली, 24 फ़रवरी 2026 । राजधानी से जुड़े एक अहम मामले में Delhi High Court ने दिल्ली वक्फ बोर्ड और मस्जिदों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद इसे निराधार मानते हुए खारिज करने का फैसला सुनाया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (23 फरवरी) को 1980 की वक्फ अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दिया. इस याचिका में जहांगीरपुरी स्थित तीन मस्जिदों को सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा बताया गया था. यह याचिका एक गैर सरकारी संगठन (NGO) ‘सेव इंडिया’ ने दायर की थी.
दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि ‘सेव इंडिया’ की यह याचिका पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं है, जिसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि हम इस याचिका पर सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं और उस याचिका को पेंडिंग एप्लीकेशन के साथ खारिज कर दिया.कोर्ट ने कहा कि करीब 46 साल पहले जारी किए गए नोटिफिकेशन पर छोटी-मोटी बातों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि वक्फ संपत्तियों और कुछ मस्जिदों के प्रबंधन में अनियमितताएं हैं तथा इनके उपयोग और नियंत्रण को लेकर जांच की आवश्यकता है। हालांकि अदालत ने कहा कि प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे जनहित याचिका पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत साबित हो सके।
मामले में Delhi Waqf Board का पक्ष था कि बोर्ड वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्य कर रहा है और संपत्तियों का प्रबंधन संबंधित कानूनों के अनुसार किया जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि PIL का दायरा सीमित है और इसे व्यक्तिगत या अस्पष्ट आरोपों के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी को विशिष्ट शिकायत है तो वह उचित कानूनी मंच का सहारा ले सकता है, लेकिन जनहित याचिका का उपयोग व्यापक और ठोस सार्वजनिक हित के मामलों तक सीमित रहना चाहिए।
इस फैसले को वक्फ बोर्ड के लिए राहत माना जा रहा है, जबकि याचिकाकर्ता के पास अब उच्चतम न्यायालय में अपील का विकल्प खुला है। फिलहाल, हाई कोर्ट के इस निर्णय से संबंधित विवाद पर विराम लग गया है।
