दिल्ली ट्रिपल-मर्डर केस- लड्डू में सल्फास, नींद की गोलियां मिलाईं

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नई दिल्ली, 17 फ़रवरी 2026 । राजधानी दिल्ली में सामने आए ट्रिपल-मर्डर केस ने पूरे इलाके को दहला दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोप है कि पीड़ितों को लड्डू में सल्फास (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड) और नींद की गोलियां मिलाकर खिलाया गया, जिससे उनकी हालत बिगड़ी और बाद में मौत हो गई। यह मामला पारिवारिक विवाद, संपत्ति या व्यक्तिगत रंजिश जैसे संभावित कारणों की दिशा में जांच का विषय बना हुआ है।

दिल्ली के आउटर जिले के पश्चिम विहार ईस्ट इलाके में धनवर्षा कराने के नाम पर एक महिला समेत तीन लोगों की हत्या करने वाले तांत्रिक कमरुद्दीन ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी लोगों को प्रसाद के रूप में खिलाने वाले लड्डू में एक सल्फाज और तीन नींद की गोलियां मिलकर देता था।

पुलिस ने बताया कि लड्डू खाने के तुरंत बाद व्यक्ति गहरी नींद में चला जाता था। नींद में जहर आराम से अपना काम करता था। आरोपी नींद की गोलियों की मात्रा इसलिए अधिक रखता था, ताकि लड्डू खाने के बाद व्यक्ति जल्दी अचेत हो जाए और शरीर में कोई हलचल न रहे।

पुलिस के मतुबाकि आरोपी खुद कभी भी मेडिकल स्टोर से सल्फास और नींद की गोलियां खरीदने नहीं जाता था। जिससे वह लोगों की नजर में न आए। वह यह कहकर गोलियां मंगवाता था कि गेहूं में दवा लगाने के लिए सल्फास की जरूरत है।

क्या है पूरा मामला?

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपित ने विश्वास का फायदा उठाकर मिठाई के जरिए जहर देने की साजिश रची। सल्फास एक अत्यंत जहरीला पदार्थ है, जिसका उपयोग आमतौर पर अनाज संरक्षण में कीटनाशक के रूप में होता है। इसे भोजन में मिलाना बेहद घातक साबित हो सकता है। साथ ही, नींद की गोलियां मिलाने से पीड़ितों को तुरंत असहजता का अंदेशा कम होता है और वे बेहोशी की हालत में चले जाते हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक विश्लेषण में विषाक्त तत्वों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी फुटेज और लेन-देन के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

जांच के प्रमुख पहलू

  • फॉरेंसिक रिपोर्ट में जहरीले तत्वों की पुष्टि

  • संदिग्ध के बयान और घटनास्थल से बरामद सबूत

  • संभावित मकसद: संपत्ति विवाद, पारिवारिक तनाव या आर्थिक कारण

  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और मेडिकल इतिहास की जांच

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत दंडनीय होगा, जिसमें आजीवन कारावास या कठोर सजा का प्रावधान है।

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि आपसी विश्वास का दुरुपयोग किस हद तक घातक हो सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है, और दोषियों को कानून के मुताबिक सख्त सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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