महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि, मोदी ने श्रद्धांजलि दी

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नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 । देशभर में महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली में गांधी जयंती स्थल पर दीप प्रज्वलित कर, फूल अर्पित कर और मौन श्रद्धांजलि देकर राष्ट्रपिता की याद में सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर मोदी ने महात्मा गांधी के आदर्शों — अहिंसा, सत्य, स्वराज और सर्वहित — को आज के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में पुनः याद दिलाया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 78वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

PM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन। पूज्य बापू का हमेशा स्वदेशी पर बल रहा, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का भी आधारस्तंभ है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व देशवासियों को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।

राहुल गांधी ने लिखा कि राष्ट्रपिता ने हमें मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है।

राहुत गांधी बोले- सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती

राहुल गांधी ने X पर लिखा कि महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं। वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफरत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की।

मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताकत से बड़ी सत्य की शक्ति होती है। हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।

देशभर के राज्यों में भी स्थानीय कार्यक्रम आयोजित किए गए — स्कूलों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और पंचायतों द्वारा गांधी पर देशभक्ति रालियाँ, शांति मार्च, श्लोक पाठ और वक्तृत्व प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें हजारों नागरिकों ने भाग लिया।
मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भी गांधीवादी चिंतन पर चर्चा- सत्र और सार्वजनिक पत्रिकाओं में विशेष लेख प्रकाशित किए, ताकि युवा पीढ़ी गांधी के विचारों की गहराई को समझ सके।

78वीं पुण्यतिथि पर यह पुनः प्रतीक है कि महात्मा गांधी आज भी न केवल भारत के इतिहास में बल्कि विश्व स्तर पर शांति, अहिंसा और सामाजिक समरसता के प्रतीक के रूप में स्मरणीय हैं।

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