हिटलर के बाद सबसे ताकतवर सेना बनाने में जुटा जर्मनी

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बर्लिन, 23 जनवरी 2026 ।  हाल के वर्षों में जर्मनी ने अपनी सैन्य क्षमता बोन्डस्वेहर (Bundeswehr) को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक योजनाएँ शुरू कर दी हैं, ताकि वह यूरोप की सबसे ताकतवर पारंपरिक सेना बन सके। यह निर्णय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की “औपचारिक सैन्य न्यूनता” की नीतियों को रद्द करते हुए, देश की रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी ने लंबे समय तक सैन्य ताकत से दूरी बनाए रखी, लेकिन अब उसने सेना पर खर्च बढ़ा दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन सरकार यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाने के मिशन पर निकल चुकी है।

युवाओं को सेना में लाने के लिए करीब ₹2.5 लाख महीने तक का ऑफर दिया जा रहा है। रूस के बढ़ते खतरे और ट्रम्प के दौर में अमेरिका से टूटते भरोसे ने जर्मनी को यह एहसास दिला दिया है कि अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे खुद ही उठानी होगी। यह बदलाव रूस-यूक्रेन युद्ध और नाटो के बदलते सुरक्षा माहौल के बीच आया है, जहाँ यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा अधिक आत्मनिर्भर रूप से सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। जर्मनी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सैन्य विस्तार पर सीमित रहता था, अब अपने बलों को रणनीतिक, आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

हर युवा को फिटनेस सर्टिफिकेट भरना होगा

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल की शुरुआत से ही जर्मनी में 18 साल के लड़कों को एक जरूरी फॉर्म भेजा जा रहा है। इसमें उनसे पूछा जा रहा है कि वे सेना में जाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कितने सक्षम हैं।

यह नियम पिछले महीने पास हुए एक नए कानून के बाद लागू किया गया है। वहां पर सेना में भर्ती होना स्वैच्छिक (इच्छा से) है, लेकिन नया कानून सरकार को यह अधिकार देता है कि अगर जरूरत पड़ी तो जरूरी सैन्य सेवा भी लागू की जा सकती है।

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