ISL शुरू नहीं हुई, खिलाड़ियों ने FIFA से मदद मांगी

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नई दिल्ली, भारतीय फुटबॉल जगत इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। इंडियन सुपर लीग (ISL) के नए सीजन की शुरुआत तय समय पर नहीं हो सकी है, जिससे खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। लीग में हो रही देरी से नाराज़ और परेशान खिलाड़ियों ने अब सीधे विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA से मदद की गुहार लगाई है। यह कदम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में बेहद गंभीर और असाधारण माना जा रहा है।

इंडियन सुपर लीग (ISL) होगी या नहीं, इस बारे में अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है। इस अनिश्चितता की वजह से भारतीय और विदेशी फुटबॉल खिलाड़ी चिंतित हैं। खिलाड़ियों ने FIFA से अपील की है कि वह भारत के इस फ्रेंचाइजी फुटबॉल टूर्नामेंट की स्थिति को सुलझाने में मदद करे।

भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन ने भी FIFA से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि देश में फुटबॉल की हालत सुधर सके।

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (MRA) को लेकर विवाद चल रहा है। इसी विवाद की वजह से इस सीजन इंडियन सुपर लीग (ISL) अब तक शुरू नहीं हो पाई है।

25 अगस्त को यह खबर आई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से आपसी मतभेद सुलझाने को कहा था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

सूत्रों के अनुसार, ISL की देरी के पीछे प्रशासनिक और व्यावसायिक मुद्दे अहम कारण बताए जा रहे हैं। लीग के आयोजन, क्लब लाइसेंसिंग, प्रसारण और शेड्यूल को लेकर कई स्तरों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इसका सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ रहा है, जो मैदान पर खेलने के बजाय भविष्य की चिंता में घिरे हुए हैं। खासकर युवा भारतीय फुटबॉलरों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है।

FIFA से मदद मांगने का फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संस्था आमतौर पर तभी हस्तक्षेप करती है जब किसी देश के फुटबॉल ढांचे में गंभीर अनियमितता या खिलाड़ियों के अधिकारों का उल्लंघन होता है। खिलाड़ियों की उम्मीद है कि FIFA के हस्तक्षेप से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और लीग प्रबंधन पर दबाव बनेगा और जल्द समाधान निकलेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय फुटबॉल की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में ISL ने देश में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन मौजूदा संकट से प्रशंसकों में निराशा फैल रही है। अगर जल्द ही लीग शुरू नहीं हुई तो इसका असर राष्ट्रीय टीम की तैयारी, घरेलू प्रतिभाओं के विकास और स्पॉन्सरशिप पर भी पड़ सकता है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि FIFA इस मामले में क्या रुख अपनाती है और भारतीय फुटबॉल प्रशासन कितनी जल्दी स्थिति को संभाल पाता है। खिलाड़ियों की मांग साफ है—लीग की जल्द शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट की सुरक्षा और भविष्य को लेकर स्पष्टता। आने वाले दिन भारतीय फुटबॉल के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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