जयशंकर ने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से हाथ मिलाया

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नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 । विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से हाथ मिलाने की घटना ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया है। भारत-पाक संबंधों के लंबे समय से तनावपूर्ण रहने के बीच यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। हालांकि इसे औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया। दोनों बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के फ्यूनरल में पहुंचे थे।

भारत–पाकिस्तान के बीच मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के किसी बड़े नेताओं ने आमने-सामने मुलाकात की और हाथ मिलाया। इसी वजह से यह मुलाकात कूटनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही है।

इससे पहले एशिया कप क्रिकेट मैच के दौरान टीम इंडिया ने पाकिस्तानी प्लेयर्स से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। जिस पर खूब विवाद हुआ था। इतना ही नहीं सीरीज जीतने के बाद भी टीम इंडिया ने ACC चीफ मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन नकवी PCB के चीफ और पाकिस्तान सरकार में मंत्री हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे प्रतीकात्मक क्षण कई बार संदेश देने का माध्यम भी बनते हैं। यह संकेत हो सकता है कि भारत संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं रखना चाहता, हालांकि आतंकवाद और सीमा पार हिंसा जैसे मुद्दों पर भारत का रुख पहले की तरह सख्त बना हुआ है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि किसी भी सार्थक बातचीत के लिए ठोस कदम और अनुकूल माहौल जरूरी है, जो फिलहाल मौजूद नहीं दिखता।

देश के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ इसे सामान्य कूटनीतिक व्यवहार बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनावश्यक महत्व देने की कोशिश मान रहे हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि भारत की पाकिस्तान नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

कुल मिलाकर, जयशंकर और पाकिस्तानी संसद के स्पीकर के बीच हाथ मिलाने की यह घटना भले ही क्षणिक हो, लेकिन इसने भारत-पाक संबंधों को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रहता है या इसके आगे भी कोई कूटनीतिक पहल देखने को मिलती है।

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