2 साल में 14 लाख पढ़े-लिखे पाकिस्तानियों ने देश छोड़ा

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इस्लामाबाद, 26 दिसंबर 2025 । पाकिस्तान पिछले दो वर्षों में गंभीर ‘ब्रेन ड्रेन’ की चुनौती से जूझता नजर आ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों और विभिन्न आकलनों के अनुसार, करीब 14 लाख पढ़े-लिखे और कुशल पाकिस्तानियों ने बेहतर भविष्य की तलाश में देश छोड़ दिया है। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल्स, अकाउंटेंट्स, शिक्षक और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ शामिल बताए जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही है, बल्कि देश के सामाजिक और संस्थागत ढांचे को भी कमजोर कर रही है।

पाकिस्तान में पिछले 2 साल में 14 लाख पढ़े-लिखे लोगों ने देश छोड़ दिया है। लोग महंगाई, आतंकवाद, कमजोर अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से देश छोड़ने पर मजबूर हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल करीब 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट देश से बाहर चले गए। सबसे ज्यादा असर नर्सिंग सेक्टर पर पड़ा है।

ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट के मुताबिक, सिर्फ 2024 में ही लगभग 7.27 लाख पाकिस्तानियों ने विदेश में काम करने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। वहीं नवंबर 2025 तक करीब 6.87 लाख लोग देश छोड़ चुके थे। बीते 2 सालों में कुल मिलाकर 14 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी विदेश जा चुके हैं।

इस बीच पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर का सोशल मीडिया पर मजाक बन रहा है। कुछ महीने पहले आसिम मुनीर ने अमेरिका दौरे पर प्रवासी पाकिस्तानियों को देश की शान बताया था और कहा था कि इसे ‘ब्रेन ड्रेन’ नहीं बल्कि ‘ब्रेन गेन’ कहा जाना चाहिए। उनका कहना था कि विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी देश के लिए गर्व हैं।

इस पलायन का सीधा असर पाकिस्तान के स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों और नर्सों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जबकि इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों के जाने से नवाचार और उत्पादकता पर असर दिख रहा है। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में भी अनुभवी शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है, जिससे दीर्घकाल में मानव संसाधन विकास बाधित होने का खतरा है।

सरकारी स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए कुछ नीतिगत प्रयासों की चर्चा जरूर है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ठोस सुधारों की रफ्तार धीमी है। निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन, वेतन संरचना में सुधार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदमों के बिना इस रुझान को पलटना मुश्किल होगा। साथ ही, प्रवासी पेशेवरों को वापस लाने या दूरस्थ योगदान के अवसर देने की रणनीतियों पर भी जोर देने की जरूरत बताई जा रही है।

कुल मिलाकर, 14 लाख पढ़े-लिखे नागरिकों का पलायन पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है। यदि आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ‘ब्रेन ड्रेन’ देश की विकास क्षमता को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। आने वाले वर्षों में सरकार की नीतियां और सुधार इस चुनौती से निपटने में निर्णायक साबित होंगे।

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