ऑस्ट्रेलिया में 18 मैच बाद इंग्लैंड की जीत

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नई दिल्ली, ऑस्ट्रेलिया की धरती पर इंग्लैंड ने 18 मैचों के लंबे अंतराल के बाद जीत दर्ज कर क्रिकेट इतिहास में एक यादगार अध्याय जोड़ दिया। यह जीत सिर्फ एक मैच का परिणाम नहीं थी, बल्कि वर्षों से चले आ रहे उस दबाव और मनोवैज्ञानिक बढ़त को तोड़ने का प्रतीक बनी, जो ऑस्ट्रेलिया को घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ हासिल थी। इंग्लिश टीम ने इस मुकाबले में हर विभाग में संतुलित प्रदर्शन करते हुए साबित कर दिया कि वह विदेशी परिस्थितियों में भी मुकाबला जीतने का माद्दा रखती है।

मैच की शुरुआत से ही इंग्लैंड का इरादा साफ नजर आया। बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का सही मिश्रण दिखाया। शुरुआती झटकों के बावजूद मिडिल ऑर्डर ने पारी को संभाला और उपयोगी साझेदारियां कीं। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की सटीक लाइन-लेंथ के बावजूद इंग्लैंड के बल्लेबाज दबाव में नहीं आए और रन गति बनाए रखी। इससे टीम एक प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचने में सफल रही, जिसने मेजबान टीम पर मानसिक दबाव बना दिया।

इंग्लैंड ने एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हरा दिया। इसी के साथ इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में 18 टेस्ट मैचों से चला आ रहा जीत का इंतजार खत्म किया। इससे पहले इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में आखिरी टेस्ट जीत 2011 में सिडनी (SCG) में मिली थी।

इसके बाद खेले गए 18 टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने 16 मैच जीते, जबकि 2 मुकाबले ड्रॉ रहे। इंग्लैंड का यह बिना जीत का दौर 2013-14 की एशेज सीरीज में 5-0 से हार के बाद शुरू हुआ था।

मैच के दूसरे दिन शनिवार को ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को जीत के लिए 175 रन का टारगेट दिया था, जिसे इंग्लिश टीम ने 6 विकेट खोकर हासिल कर लिया। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में 132 रन पर ऑलआउट हो गई थी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 152 रन पर सिमट गई थी, जबकि इंग्लैंड पहली पारी में 110 रन ही बना सका था।

इस तरह ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 42 रन की बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरी पारी में इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। मैच में कुल 7 विकेट लेने वाले इंग्लिश पेसर जोश टंग को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में लगातार निराशा हाथ लगी थी। घरेलू पिचों और दर्शकों के दबाव में इंग्लिश टीम अक्सर लड़खड़ा जाती थी, लेकिन इस बार टीम ने हालात को बेहतर ढंग से पढ़ा और उसी के अनुसार रणनीति बनाई। कप्तान की सूझबूझ भरी फैसलेबाजी और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास इस जीत के मुख्य आधार रहे।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत इंग्लैंड के लिए आने वाले दौरों और बड़ी सीरीज में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित होगी। वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए यह हार चेतावनी की तरह है कि घरेलू मैदान पर भी किसी विरोधी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कुल मिलाकर, यह मुकाबला सिर्फ जीत-हार से आगे बढ़कर क्रिकेट में बदलते संतुलन और प्रतिस्पर्धा का संकेत बन गया है।

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