राहुल जर्मनी में बोले-RSS के लिए सच्चाई नहीं, शक्ति जरूरी

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नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2025 । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जर्मनी दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि RSS की विचारधारा में सच्चाई और संवाद के लिए कोई जगह नहीं है, बल्कि वहां सिर्फ शक्ति को ही सर्वोपरि माना जाता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भारतीय लोकतंत्र, विचारों की स्वतंत्रता और संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता जताई।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत की आलोचना की। राहुल ने कहा- RSS चीफ खुले तौर पर कह रहे हैं कि सच्चाई का कोई महत्व नहीं है, शक्ति महत्वपूर्ण है। यही उनमें और हममें अंतर है।

राहुल ने कहा- हमारी पूरी संस्कृति सत्य पर आधारित है। आप किसी भी धर्म को देख लें, मूल रूप से वे यही कहते हैं कि सत्य का पालन करो। कांग्रेस, महात्मा गांधी और आप सभी, हम भारत के सत्य की रक्षा करते हैं। RSS ऐसा नहीं करती।

बता दें कि राहुल गांधी 5 दिन के जर्मनी दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को ओवरसीज इंडियन कांग्रेस के कार्यक्रम ‘कनेक्टिंग कल्चर्स’ में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने जर्मन थिंक-टैंक में शामिल नेताओं के साथ बातचीत की और हर्टी स्कूल में भी स्पीच दी।

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संवाद, असहमति और सच्चाई को स्वीकार करने में होती है, लेकिन RSS की सोच इसके विपरीत है। उनके अनुसार, जब किसी समाज में केवल ताकत और दबाव के जरिए विचार थोपे जाते हैं, तो वह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की परंपरा बहुलता, सहिष्णुता और सवाल पूछने की रही है, जिसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

अपने भाषण में राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि देश में संस्थानों पर दबाव बढ़ रहा है और असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने युवाओं और बुद्धिजीवियों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। राहुल ने कहा कि भारत की आत्मा सच्चाई, करुणा और न्याय में बसती है, न कि डर और ताकत के प्रदर्शन में।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। विदेश में दिए गए इस बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है और इसे आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा माना जा रहा है।

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