अमेरिकी संसद में ‘मोदी‑पुतिन कार’ तस्वीर पर तीखी बहस, ट्रंप की विदेश नीति पर आलोचना बढ़ी

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वॉशिंगटन, 11 दिसंबर 2025 । हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस (लोकसभा की भांति) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ डेमोक्रेटिक सांसद सिडनी कामलागर-डोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की एक कार/सेल्फी वाली तस्वीर को बहस के दौरान दिखाया और अमेरिका की विदेश नीति पर तीखी आलोचना की

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा अमेरिका में भी चर्चा में बना हुआ है। एक अमेरिकी सांसद ने पीएम मोदी और पुतिन की सेल्फी वाली तस्वीर दिखाकर राष्ट्रपति ट्रम्प की विदेश नीति की आलोचना की।

अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कैमलेगर-डव ने मोदी-पुतिन की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह पोस्टर हजार शब्दों के बराबर है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत नीति की कड़ी आलोचना की।

डव ने कहा, “ट्रम्प की भारत को लेकर नीतियां ऐसी हैं जैसे हम खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हों। दबाव डालकर साझेदारी करना महंगा साबित होता है। और यह पोस्टर इसका सबसे बड़ा सबूत है। अमेरिका की दबाव वाली नीति भारत को रूस के करीब धकेल रही है।”

ट्रम्प के नोबेल प्राइज की डिमांड पर तंज कसा

सांसद डव ने ट्रम्प के उस दावे पर भी तंज कसा जिसमें ट्रम्प खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार बताते रहे हैं और दावा करते हैं कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान भी शामिल है।

डव ने कहा, “जब कोई देश अपने सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों को ही विरोधियों की ओर धकेल दे, तो वह नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार नहीं कहलाता।”

सांसद बोलीं- नुकसान को जल्द ठीक करना जरूरी

डव ने आगे कहा कि अमेरिका को अब बेहद तेजी से कदम उठाने होंगे, ताकि ट्रम्प प्रशासन की नीतियों से अमेरिका-भारत साझेदारी को जो नुकसान हुआ है, उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच वह भरोसा और सहयोग फिर से बहाल करना जरूरी है, जो अमेरिका की समृद्धि, सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के लिए अनिवार्य है।

ये टिप्पणियां हाउस फॉरेन अफेयर्स सबकमेटी ऑन साउथ एंड सेंट्रल एशिया की उस सुनवाई के दौरान आईं, जिसका विषय था- ‘अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी: एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा’।

इस तस्वीर को अमेरिकी संसद के House Foreign Affairs Subcommittee on South and Central Asia की सुनवाई के दौरान एक पोस्टर की तरह पेश किया गया। कामलागर-डोव ने कहा कि यह ‘एक हजार शब्दों के बराबर’ है और इसे देखकर स्पष्ट होता है कि अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति — खासकर भारत के प्रति — विफल और आत्म-नुकसानकारी साबित हो रही है। उन्होंने यह तर्क दिया कि ट्रंप प्रशासन की तरह की दबाव-युक्त नीतियाँ भारत को रूस के करीब धकेल रही हैं, जिससे साझेदारी और रणनीतिक विश्वास दोनों को नुकसान हो रहा है।

सांसद ने यह भी बताया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ और खींचतानपूर्ण नीतियाँ (जैसे भारत पर उच्च शुल्क) अमेरिका के लिए खुद नुकसानदेह हैं और इसके चलते दोनों देशों के बीच के लंबे समय के रणनीतिक संबंध और भरोसा कमज़ोर हो सकते हैं। उन्होंने चेताया कि ऐसे नीतिगत फैसले संयुक्त राज्य की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और सुरक्षा हितों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

इस बहस में ट्रंप पर यह भी आरोप लगाया गया कि उनके विदेश नीति कदम दबाव-युक्त रणनीति प्रैक्टिस की निशानी हैं, न कि सहयोग-आधारित करीबी साझेदारी की दिशा में सकारात्मक क़दम। सांसद का कहना था कि अगर अमेरिका अपनी नीतियाँ नहीं बदलता, तो यह भारत को केवल रूस और अन्य साझेदारों की ओर प्रवृत्त करेगा — जो अमेरिका के सामरिक हितों को हानि पहुँचा सकता है।

इस घटना ने न केवल अमेरिकी संसद में विदेश नीति पर नई बहस को जन्म दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि भारत-अमेरिका रिश्तों पर द्विपक्षीय समर्थन और आलोचना दोनों ही गहराई से मौजूद हैं — जहाँ कुछ अमेरिकी नेताओं को लगता है कि ट्रंप की नीतियाँ साझेदारी को कमजोर कर रही हैं।

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