सिद्धारमैया–डीके शिवकुमार — पहले ब्रेकफास्ट, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस: क्या कांग्रेस की एकता दोबारा कायम होगी?

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कर्नाटक , 29  नवम्बर 2025 । आज कर्नाटक की राजनीति में एक अहम क्षण रहा — जहां पहले सुबह ब्रेकफास्ट की मेज़ पर और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के प podium पर, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने जनता और पार्टी दोनों को एकजुटता का संदेश दिया।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान के बीच आज सुबह 10:15 बजे CM सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने साथ में ब्रेकफास्ट किया।

एक घंटे बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सिद्धारमैया ने कहा- हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और न ही भविष्य में होगा। हम साथ में मिलकर काम करेंगे।

वहीं डीके शिवकुमार ने कहा- हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसका पालन करेंगे और कोई ग्रुप नहीं है। मैं मुख्यमंत्री के साथ हूं, कर्नाटक के विकास को प्राथमिकता देंगे।

दरअसल दोनों नेताओं की ये मुलाकात हाईकमान के आदेश के बाद हुई है। पिछले 15 दिनों से दोनों गुटों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेता को सीएम पद पर देखना चाह रहे है।

2023 में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री पद के लिए 2.5-2.5 साल की डील हुई थी, लेकिन सिद्धारमैया समर्थक इसे नकारते आए हैं। वहीं पार्टी की तरफ से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की 3 बड़ी बातें…

  • CM ने कहा- BJP और JDS को झूठे आरोप लगाने की आदत है। BJP और JDS ने बयान दिया है कि वे नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 सीटें हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 हैं। यह एक बेकार की कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।
  • शिवकुमार बोले- आप सभी के सपोर्ट से हम कांग्रेस सरकार लाए हैं और हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। राज्य के लोग अपना पूरा सपोर्ट दे रहे हैं। हमें उनकी इच्छाएं पूरी करनी हैं। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। CM ने जो भी कहा, मैं CM के साथ हूं।
  • जहां तक ​​लीडरशिप के मामले की बात है, हम अपनी पार्टी हाईकमान को मानते हैं। वे जो भी कहते हैं, वह हमारा फैसला है। हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश में पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन हमें भरोसा है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा, हम 2028 में सरकार दोहराएंगे।

पिछले कुछ समय से कर्नाटक में ये अटकलें तेज थीं कि सत्ता-साझेदारी व मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ गया है। विशेष रूप से, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के समर्थकों की ओर से मुख्यमंत्री पद का दावा किया जा रहा था। इस असमंजस और कांग्रेस के भीतर खिसकन को देखते हुए, पार्टी हाईकमान ने दोनों को शांत करने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए ये बातचीत तय की।

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