- संविधान हमारा स्वाभिमान – विजेंद्र गुप्ता
- विभिन्न धर्म, भाषाएँ और पहचानों के बावजूद, संविधान हर भारतीय को एक सूत्र में पिरोता है – रेखा गुप्ता
नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025 । “भारत की राजधानी दिल्ली को उत्कृष्टता का वैश्विक मानक स्थापित करना चाहिए। यह लंदन, वॉशिंगटन या किसी और शहर जैसा बनने की नहीं बल्कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में उभरे” यह बात भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने संविधान स्वीकृति की 75वीं वर्षगांठ तथा विशेष रूप से संजोकर तैयार की गई “दिल्ली विधानसभा की प्रस्तुति शताब्दी–यात्रा, वीर विट्ठलभाई पटेल” कॉफी टेबल बुक के अनावरण अवसर पर कही। यह विशेष पुस्तक 24 अगस्त 1925 को केंद्रीय विधान सभा के प्रथम भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष बने श्री विट्ठलभाई पटेल के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में तैयार की गई है। इसका औपचारिक विमोचन माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा किया गया।इस अवसर पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना एवं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विशिष्ट अतिथियों के रूप में उपस्थित थे। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर अपना स्वागत उद्बोधन दिया। उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री परवेश साहिब सिंह, रविन्द्र इन्द्राज सिंह तथा दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। साथ ही, असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी, राज्यसभा सांसद सुश्री स्वाति मालीवाल, विधायकगण, वरिष्ठ नेता एवं पार्षदगण भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। संविधान दिवस के अवसर पर उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने उपस्थित नागरिकों को शपथ दिलाई तथा भारत सरकार द्वारा संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने पर तैयार तीन मिनट की एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।
उपराष्ट्रपति ने विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “विधानसभा भवन स्वयं बोलते हैं; और दैनिक विधायी कार्यवाही वैसी होनी चाहिए जैसी एक लोकतंत्र में अपेक्षित है।” उन्होंने कॉफी टेबल बुक के विमोचन की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक भारत की विधायी यात्रा का सूक्ष्म और विश्लेषणात्मक संकलन है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा द्वारा 24–25 अगस्त, 2025 को अखिल भारतीय अध्यक्ष सम्मेलन के सफल आयोजन की प्रशंसा की और कहा कि प्रथम भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष श्री विट्ठलभाई पटेल के पदभार ग्रहण के शताब्दी वर्ष का स्मरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि श्री पटेल का नेतृत्व स्वतंत्र भारत के सभी पीठासीन अधिकारियों के लिए आदर्श बना हुआ है।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यह भवन कभी साम्राज्यवादी विधायी परिषद एवं प्रथम केन्द्रीय विधान सभा की ऐतिहासिक कार्यवाहियों का साक्षी रहा है, जहां नागरिक अधिकारों, प्रतिनिधिक शासन एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर महत्वपूर्ण बहसें हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक इतिहास को संरक्षित करती है और आने वाली पीढ़ियों को हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग से जोड़ती है। यह नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी बनाती है ताकि वे संविधान की भावना को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात कर सकें।
उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की दृष्टि और पहल की प्रशंसा की, जिसके फलस्वरूप यह सम्मेलन और प्रकाशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने विधायकों से अपेक्षा की कि वे संवाद, वाद-विवाद और चर्चा के माध्यम से रचनात्मक योगदान दें क्योंकि लोकतंत्र का आधार सामूहिक सहयोग पर टिका है। उन्होंने देश के नागरिकों,छात्रों, श्रमिकों, छोटे उद्यमियों और उद्योग जगत से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा निर्धारित कर्तव्यों का पालन ही सच्चा लोकतांत्रिक सम्मान है और भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संविधान दिवस के अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए वी. के. सक्सेना ने कहा कि संविधान सभा की दूरदर्शिता ने भारत को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव दी। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस मनाना हमें इन आदर्शों के प्रति अपनी सामूहिक दृढ़ता को पुनः पुष्ट करने का अवसर देता है। दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सदन लम्बे समय से नागरिकता, अधिकारों और शासन संबंधी महत्वपूर्ण विमर्श का केंद्र रहा है।
उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने कहा कि विधानसभा की विरासत को संजोते हुए, पुस्तक का प्रकाशन अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि आठवीं विधानसभा के प्रारंभ में उन्होंने इस पुस्तक के निर्माण का सुझाव अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को दिया था और आज इसे साकार होते देख उन्हें अत्यंत संतोष प्राप्त हुआ है। संविधान दिवस के अवसर पर उन्होंने संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि संविधान का प्रत्येक अक्षर भारत की आत्मा और लोकतांत्रिक मूल्यों का आधार है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह भारत की संवैधानिक यात्रा का गौरवपूर्ण दस्तावेज है, जो प्रत्येक नागरिक को गर्व से भर देता है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संविधान स्वीकृति दिवस का आयोजन इस ऐतिहासिक भवन में करना अत्यंत भावनात्मक और गौरवशाली क्षण है। उन्होंने कहा कि यहीं से भारत के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों की अनुगूंज प्रारंभ हुई थी। उन्होंने बताया कि कॉफी टेबल बुक में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का सौ वर्षीय अभिलेख दुर्लभ ऐतिहासिक छवियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में दुर्लभ अभिलेखीय छायाचित्रों के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सौ वर्ष तथा 2025 के ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस को विशेष रूप से दर्शाया गया है। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संविधान केवल याद करने योग्य ग्रंथ नहीं, बल्कि पालन करने योग्य कर्तव्य है, जो शासन को उत्तरदायी, संवेदनशील और भविष्य केंद्रित बनाता है।
अध्यक्ष ने विधानसभा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली विधानसभा भारत की प्रथम ऐसी विधान संस्था बन गई है जो 100% सौर ऊर्जा से संचालित हो रही है। 500 किलोवाट की रूफटॉप सौर प्रणाली से प्रतिवर्ष लगभग ₹1.75 करोड़ की बचत होगी, जिसका उपयोग जनकल्याण में किया जाएगा। साथ ही, नेवा (नेवा) की पूर्णत: पेपरलेस व्यवस्था अपनाने वाली दिल्ली 18वीं विधानसभा बन गई है, जिससे पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।
कार्यक्रम में सभी गणमान्य अतिथियों ने विधानसभा परिसर में स्थित भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं प्रथम भारतीय निर्वाचित स्पीकर श्री विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
