पाकिस्तान अरब सागर में आर्टिफिशियल आइलैंड बनाएगा

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इस्लामाबाद, 20 नवम्बर 2025 । पाकिस्तान की सरकारी ऊर्जा कंपनी Pakistan Petroleum Limited (PPL) ने घोषणा की है कि वे अरब सागर में एक कृत्रिम द्वीप (artificial island) बनाएंगे, जिसकी ऊँचाई समुद्र की उच्च ज्वार-लहरों से सुरक्षित रहने के लिए लगभग 6 फीट होगी। यह प्लेटफार्म तट से लगभग 30 किलोमीटर दूर सिंध प्रांत के सोजावल क्षेत्र के पास विकसित किया जाएगा। इस द्वीप का मुख्य उद्देश्य है — गहरे पानी में तेल एवं गैस अन्वेषण को तेज करना। PPL योजना बना रही है कि इस प्लेटफार्म से करीब 25 कुएँ (wells) स्थापित किए जाएँगे।

पाकिस्तान की सरकार ने अरब सागर में एक आर्टिफिशियल आइलैंड (कृत्रिम द्वीप) बनाने की मंजूरी दे दी है। इसे समुद्र में तेल की खोज (ऑयल एक्सप्लोरेशन) के लिए स्थायी प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (PPL) लीड करेगी।

पाकिस्तान ने यह फैसला ट्रम्प का समर्थन मिलने के बाद किया है। ट्रम्प ने जुलाई में ऐलान किया था कि अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर पाकिस्तान के बड़े तेल भंडार विकसित करेंगे। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर ये तेल मिला, तो भारत भी इसे खरीद सकता है।

अब पाकिस्तान इस आर्टिफिशियल आइलैंड की मदद से अरब सागर में 25 तेल-कुएं खोदने की योजना बना रहा है।

सिंध के तट से 30 किमी दूर बनेगा आइलैंड

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह आर्टिफिशियल आइलैंड सिंध के तट से करीब 30 किमी दूर, सुजावल इलाके के पास बनाया जा रहा है। सुजावल कराची से लगभग 130 किमी दूर है।

आइलैंड को समुद्र की ऊंची लहरों से बचाने के लिए 6 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। पहले समुद्री लहरों की वजह से जिन ड्रिलिंग प्रोजेक्ट्स में रुकावटें आई थीं, उन्हें दूर किया जा सकेगा। आइलैंड के फरवरी तक तैयार होने की उम्मीद है।

पिछले साल पाकिस्तान में तेल भंडार मिला

पाकिस्तान की समुद्री सीमा में पिछले साल सितंबर में तेल और गैस का एक बड़ा भंडार मिला था। पाकिस्तानी मीडिया हाउस डॉन के मुताबिक, इलाके में एक सहयोगी देश के साथ मिलकर 3 साल तक सर्वे किया गया था। इसमें बाद तेल और गैस रिजर्व की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

पाकिस्तान द्वारा अरब सागर में कृत्रिम द्वीप के माध्यम से गहरे-पानी अन्वेषण की यह पहल ऊर्जा-क्षेत्र में एक साहसपूर्ण कदम है। यदि यह सफल हुई, तो यह पाकिस्तान की ऊर्जा निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही, यह मॉडल अन्य दक्षिण एशियाई देश एवं समुद्री विकासशील देशों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन सकता है। हालाँकि इसके लिए समय, साहस और रणनीतिक समन्वय की आवश्यकता होगी।

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