लेह एपेक्स बॉडी की मांग- वांगचुक पर NSA हटाए

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लद्दाख , 18 नवम्बर 2025 । लद्दाख में बढ़ते जनाक्रोश और राजनीतिक असंतोष के बीच लेह एपेक्स बॉडी ने एक महत्वपूर्ण और तीखी मांग उठाई है—पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक नेता सोनम वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को तुरंत हटाया जाए। यह मांग न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गई है, क्योंकि वांगचुक लंबे समय से लद्दाख की पर्यावरणीय सुरक्षा, जनाधिकारों और संवैधानिक संरक्षण के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठा रहे हैं।

एपेक्स बॉडी का कहना है कि वांगचुक पर NSA लगाया जाना न केवल गैर-ज़रूरी बल्कि अत्यधिक दमनकारी कदम है। उनका दावा है कि वांगचुक की गतिविधियाँ अहिंसक, लोकतांत्रिक और पूरी तरह जनहित से जुड़ी रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है ताकि लद्दाख में भूमि, संसाधन और पर्यावरण से जुड़े जन-आंदोलनों को कमजोर किया जा सके।

सोनम वांगचुक पिछले कुछ महीनों से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने, स्थानीय पहचानों की सुरक्षा, हिमनदों पर खतरा बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक और सतत विकास की मांगों को लेकर सक्रिय हैं। उनकी भू-राजनीतिक संवेदनशीलता वाले इस क्षेत्र में बढ़ती आवाज़ ने केंद्र शासित प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। कई बार उन्होंने शांतिपूर्ण धरने, जलवायु संबंधित अभियानों और जनकेंद्रित अभियानों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है।

लेह एपेक्स बॉडी का आरोप है कि NSA का इस्तेमाल आतंकवाद या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए होता है, जबकि वांगचुक का रिकॉर्ड हमेशा पारदर्शी और सामाजिक upliftment से जुड़ा रहा है। उनका कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल एक चिंताजनक मिसाल पैदा करता है, जिसमें नागरिक अधिकारों का दमन और जन-आंदोलनों को दबाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि लद्दाख की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ हालिया कार्यक्रमों से क्षेत्र में अस्थिरता का जोखिम बढ़ सकता था, इसीलिए NSA को ‘प्रिवेंटिव’ कदम के तौर पर लागू किया गया। हालांकि, प्रशासन की यह दलील स्थानीय संगठनों को अस्वीकार्य लग रही है।

नेताओं ने मांगें स्पष्ट रूप से रखीं।

एलएबी के को चेयरमैन और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष चेयरिंग दोरजे लाकरुक ने कहा कि ड्राफ्ट में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगों को स्पष्ट रूप से रखा गया है। उन्होंने कहा कि सितंबर की हिंसा के बाद जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया या जिन पर मुकदमे दर्ज हुए, उनके लिए जनरल एमनेस्टी की मांग भी की गई है। साथ ही सोनम वांगचुक की रिहाई और उन पर लगे NSA को हटाने की मांग दोहराई गई।

वांगचुक को सितंबर हिंसा के बाद, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल उन्हें जोधपुर के जेल में रखा गया है।

इस विवाद ने लद्दाख के राजनीतिक वातावरण को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। लद्दाख के कई छात्र संगठन, बौद्ध मठ, सामाजिक समूह और स्थानीय नेता भी वांगचुक पर से NSA हटाने की मांग में शामिल हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि केंद्र सरकार और स्थानीय समूहों के बीच संवाद नहीं बढ़ाया गया, तो यह विवाद लद्दाख के भविष्य और वहां की स्वायत्तता संबंधी मांगों को और तीखा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना जरूरी होगा कि क्या सरकार इस मांग पर पुनर्विचार करती है या फिर आंदोलन और व्यापक होता है।

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