अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने विदेशी कर्मचारियों को सस्ता नौकर बताया

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वॉशिंगटन, 15 नवम्बर 2025 । अमेरिकी उपराष्ट्रपति के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एक टेक्नोलॉजी और रोजगार नीति से जुड़े कार्यक्रम में उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को “सस्ता और आसानी से उपलब्ध श्रम” बताया, जिसके बाद विपक्ष, मानवाधिकार समूहों और कई देशों में आलोचना शुरू हो गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका में आव्रजन नीतियों, वीज़ा कार्यक्रमों और रोजगार अवसरों पर बहस अपने चरम पर है।

बयान के बाद आलोचकों का कहना है कि यह दृष्टिकोण विदेशी कर्मचारियों के योगदान को कम आंकता है, जो वर्षों से अमेरिकी टेक सेक्टर, स्वास्थ्य सेवाओं और रिसर्च उद्योगों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी कर्मचारियों को केवल “कम कीमत के विकल्प” बताना न केवल गलत संदेश देता है, बल्कि वैश्विक प्रतिभा के प्रति नकारात्मक नजरिया भी दर्शाता है।

कई प्रवासी संगठनों ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था की मजबूती में दुनिया भर से आने वाले प्रशिक्षित पेशेवरों का बड़ा योगदान है—चाहे वह भारतीय इंजीनियर्स हों, अफ्रीकी स्वास्थ्यकर्मी हों, या यूरोपीय शोधकर्ता। उन्हें ‘सस्ता श्रम’ बताकर उनके कौशल, अनुभव और मेहनत का अनादर किया गया है।

वहीं, व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों का कहना है कि उपराष्ट्रपति का इरादा विदेशी श्रमिकों को कमतर बताने का नहीं था। उनका मकसद अमेरिकी कंपनियों द्वारा लागत कम करने के लिए किए जाने वाले आउटसोर्सिंग और विदेशी हायरिंग मॉडल पर सवाल उठाना था। हालांकि, आलोचकों का दावा है कि बयान देने से पहले भाषा और संदर्भ का ध्यान रखना आवश्यक था।

इस विवाद के बाद उम्मीद है कि अमेरिका में फिर से H-1B वीज़ा, वर्क परमिट और ग्लोबल टैलेंट नीति पर चर्चा तेज होगी। रोजगार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बयान का गलत अर्थ व्यापक स्तर पर फैल गया तो इससे अमेरिका की प्रतिभा आकर्षित करने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अमेरिकी उपराष्ट्रपति की ओर से किसी स्पष्टीकरण या सफाई का इंतजार कर रहा है, ताकि विवाद शांत हो सके।

H-1 B वीजा पूरी तरह खत्म करने की तैयारी

राष्ट्रपति ट्रम्प की करीबी और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा है कि जल्द ही H-1B खत्म करने को लेकर विधेयक लाया जाएगा। रिपब्लिकन पार्टी की मार्जोरी का आरोप है कि H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल हो रहा है।

ट्रम्प का बयान- अमेरिका में टैलेंटेड लोगों की कमी

इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका में कुछ खास प्रतिभाओं की कमी है। ट्रम्प ने कहा था कि देश में कई अहम नौकरियों के लिए पर्याप्त टैलेंटेड लोग नहीं हैं, इसलिए विदेशी स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत पड़ती है।

हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने जॉर्जिया की एक बैटरी फैक्ट्री का उदाहरण दिया था। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया की कंपनी ने 500-600 विशेषज्ञों को बैटरी बनाने और अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए भेजा था।

ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा फीस 100 गुना बढ़ाई थी

फॉक्स न्यूज की एंकर लॉरा इंग्राहम ने ट्रम्प से पूछा कि क्या H-1B वीजा की संख्या कम की जाएगी, क्योंकि इससे अमेरिकी मजदूरों के वेतन पर असर पड़ता है?

ट्रम्प ने जवाब दिया, “हां, मैं सहमत हूं, लेकिन आपको बाहर से टैलेंट भी लाना होगा।”

जब एंकर ने कहा कि अमेरिका में काफी टैलेंटेड लोग हैं, तो ट्रम्प बोले, “नहीं, कुछ खास क्षेत्रों में हमारे पास टैलेंट नहीं है। आप बेरोजगार लोगों को उठाकर मिसाइल फैक्ट्री में नहीं भेज सकते।”

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