समीर वानखेड़े को शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज का जवाब

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नई दिल्ली, 1 नवम्बर 2025 । बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट ने पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े के हालिया बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। वानखेड़े द्वारा लगाए गए आरोपों को “झूठा, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए रेड चिलीज़ ने स्पष्ट कहा है कि कंपनी जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट में IRS ऑफिसर समीर वानखेड़े की मानहानि याचिका पर शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने अपना जवाब दाखिल किया है।

रेड चिलीज ने कोर्ट में कहा कि यह शो व्यंग्य (satire) और पैरोडी है। कंपनी के मुताबिक, इसमें दिखाए गए किरदार किसी असली व्यक्ति पर आधारित नहीं हैं, इसलिए इसे मानहानि नहीं कहा जा सकता।

दरअसल, वानखेड़े ने नेटफ्लिक्स की सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड में अपने कथित रोल को लेकर मानहानि का मामला दर्ज किया था। यह शो शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने डायरेक्ट किया है। इसका प्रोडक्शन रेड चिलीज ने किया और इसे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम किया गया है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपने जवाब में कहा, “पूरे शो में जिस सीन को लेकर आपत्ति है, वह सिर्फ 1 मिनट 48 सेकेंड का है। इसमें एक पुलिस अफसर को बस जरूरत से ज्यादा उत्साही दिखाया गया है। इसमें कोई मानहानिकारक बात नहीं है।”

कंपनी ने कहा कि यह कंटेंट कला और अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में आता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सुरक्षा मिली है। उनका कहना है कि ऐसे कंटेंट पर रोक या सेंसरशिप तभी लग सकती है, जब वह अनुच्छेद 19(2) में बताए गए कारणों में शामिल हो।

रेड चिलीज ने कहा कि वानखेड़े एक सरकारी अफसर हैं, इसलिए उन्हें क्रिटिसिज्म और क्रिएटिव एक्सप्रेशन को हैंडल करना चाहिए। कंपनी ने कहा, “पब्लिक पोजिशन पर बैठे लोगों को इतना जल्दी ओवररिएक्ट नहीं करना चाहिए।”

कंपनी ने यह भी कहा कि शो बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई पहलुओं जैसे नेपोटिज्म, पैपराजी कल्चर, अडल्टरी और नए एक्टर्स की मुश्किलों को हास्य और बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के अंदाज में दिखाता है।

रेड चिलीज का कहना है कि चूंकि ये एक व्यंग्यात्मक सीरीज है, इसलिए इसमें सभी किरदारों को जानबूझकर थोड़ा एक्स्ट्रा और ओवर दिखाया गया है। ऐसे किरदार बस लोगों को हंसाने, सोचने और सोशल इश्यूज पर ध्यान खींचने के लिए होते हैं। कंपनी ने कहा, “व्यंग्य में ओवरएक्टिंग या ओवरड्रामा दिखाना आर्ट का हिस्सा है — इसका मकसद एंटरटेन करना और सोच जगाना है, किसी की इमेज खराब करना नहीं।”

मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने की। अदालत ने सभी पक्षों को 10 नवंबर तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि मशहूर हस्तियों और सरकारी अधिकारियों के बीच जुड़ी पुरानी घटनाएँ कैसे समय-समय पर फिर सुर्खियों में आ जाती हैं। हालांकि रेड चिलीज़ का सख्त रुख यह संकेत देता है कि इस बार मामला केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा।

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