कर्नाटक में डेटा सेंटर ऑपरेटर ने वोटरों के नाम हटाए

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कर्नाटक , 23 अक्टूबर 2025 । कर्नाटक में चुनावी प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक डेटा सेंटर ऑपरेटर पर आरोप लगा है कि उसने मतदाता सूची से हजारों वोटरों के नाम अनुचित तरीके से हटाए। यह खुलासा राज्य की चुनाव आयोग की प्रारंभिक जांच में हुआ है और इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गहरा सवाल उठ गया है।

कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों पर बड़ा खुलासा हुआ है। इंडिया एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने वोटर्स लिस्ट में अनियमितताओं की जांच के दौरान पाया कि एक डेटा सेंटर ऑपरेटर को प्रत्येक मतदाता के नाम फर्जी तरीके से हटाने के लिए ₹80 मिले थे।

SIT के अनुसार, दिसंबर 2022 और फरवरी 2023 के बीच आलंद सीट पर 6,018 वोटरों के नाम हटाने के आवेदन आए थे। यानी डेटा सेंटर ऑपरेटर को कुल मिलाकर ₹4.8 लाख का भुगतान किया गया। SIT ने कलबुर्गी जिला मुख्यालय में एक डेटा सेंटर की पहचान भी की है, जहां से वोटरों के नाम हटाने के एप्लिकेशन भेजे गए थे।

जांच में यह भी पता चला कि जो 6,018 एप्लिकेशन आए थे, उनमें केवल 24 ही सही थे। क्योंकि वे आलंद में अब नहीं रहते। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 सितंबर को कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त वोट चोरी और वोट डिलीट करा रहे हैं। उन्होंने आरोपों के समर्थन में आलंद के उन वोटरों को भी पेश किया, जिनके नाम हटाने की कोशिश की गई थी।

CID ​​की साइबर क्राइम यूनिट मामले की जांच कर रही थी। 26 सितंबर को SIT ने जांच अपने हाथ में ले ली थी। पिछले हफ्ते, SIT ने भाजपा नेता सुभाष गुट्टेदार से जुड़ी संपत्तियों पर छापे मारे। 2023 में सुभाष गुट्टेदार आलंद से कांग्रेस के बी आर पाटिल से हार गए थे।

SIT की जांच में 5 बड़े खुलासे-

1. स्थानीय पुलिस की जांच के दौरान फरवरी 2023 में वोटरों के नाम हटाने का पता चला था। इसके बाद CID ने जांच की। इस दौरान मामले में आलंदा के स्थानीय निवासी मोहम्मद अशफाक के शामिल होने की जानकारी मिली। अशफाक से 2023 में पूछताछ हुई। उसने खुद को निर्दोष बताया और अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सौंपने का वादा किया, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। इसके बाद वह दुबई चला गया।

2. अब इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और अशफाक से जब्त किए गए उपकरणों की जांच से पता चला है कि वह इंटरनेट कॉल के जरिए अपने एक सहयोगी, मोहम्मद अकरम, और तीन अन्य लोगों के संपर्क में था। पिछले हफ्ते, SIT ने उनमें से चार की संपत्तियों की तलाशी ली।

3. इस दौरान कलबुर्गी में मतदाता सूची में हेरफेर करने के लिए एक डेटा सेंटर के संचालन और हर नाम काटने पर ₹80 के भुगतान की बात स्थापित करने वाले सबूत मिले। जांच में पता चला कि डेटा सेंटर का संचालन मोहम्मद अकरम और अशफाक कर रहे थे, जबकि अन्य लोग डेटा एंट्री ऑपरेटर थे।

4. SIT को एक लैपटॉप भी मिला, जिससे वोटरों के नाम हटाने के लिए अप्लाई किया गया था। इसके आधार पर 17 अक्टूबर को भाजपा नेता सुभाष गुट्टेदार ​​​​​​, उनके बेटों हर्षानंद और संतोष, और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट सहयोगी मल्लिकार्जुन महंतगोल की संपत्तियों की तलाशी ली गई।

5. सभी के मोबाइल फोन के साथ सात से ज्यादा लैपटॉप जब्त किए गए हैं। डेटा सेंटर ऑपरेटर को पैसे कौन ट्रांसफर कर रहा था, इसकी जांच की जा रही है। जांच ​​में पता चला कि चुनाव आयोग के रजिस्ट्रेशन कराने और आलंद की मतदाता सूचियों में बदलाव के लिए 75 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ था, जो पोल्ट्री फार्म के कर्मचारी से लेकर पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार तक के नाम पर दर्ज हैं।

यह मामला भारत में डिजिटल गवर्नेंस और डेटा नियंत्रण की सीमाओं पर गहन मंथन की मांग करता है। डिजिटल युग में जहां पारदर्शिता और तकनीक का मेल लोकतंत्र को सशक्त बना सकता है, वहीं गलत हाथों में डेटा का दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है।

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