पंकज धीर ने कर्ण को कृष्ण की नजर से समझा

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नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 । महाभारत का कर्ण सदैव एक रहस्यमय, जटिल और करुण चरित्र रहा है — वीरता, त्याग और दुर्भाग्य का प्रतीक। टीवी धारावाहिक महाभारत (1988) में कर्ण का किरदार निभाने वाले अभिनेता पंकज धीर ने हाल ही में कहा कि उन्होंने कर्ण को “कृष्ण की नजर से” देखने की कोशिश की, क्योंकि केवल वही दृष्टि उसके कर्मों और संघर्षों को संतुलित रूप में समझा सकती है।

बी.आर. चोपड़ा की टीवी सीरीज ‘महाभारत’ में ‘कर्ण’ का किरदार निभाने वाले एक्टर पंकज धीर का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन के बाद ‘महाभारत’ में उनके साथ काम करने वाले एक्टर नीतिश भारद्वाज और गजेंद्र चौहान ने दुख जताया। साथ ही दोनों ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए उनसे जुड़े कई किस्से शेयर किए।

नीतिश भारद्वाज ने कहा कि ‘महाभारत’ में कर्ण का किरदार इतना प्रतिष्ठित था कि वे दोनों अक्सर इस पर चर्चा करते थे। ‘कर्ण’ और ‘कृष्ण’ दोनों ही महाभारत के केंद्रीय पात्र थे। नीतिश के अनुसार, पंकज धीर की विशेषता यह थी कि वह कर्ण को ‘कृष्ण के दृष्टिकोण’ से समझना चाहते थे।

उस सीन की तैयारी को याद करते नीतिश भारद्वाज ने कहा कि जब कृष्ण कर्ण को उनकी असली पहचान बताते हैं कि वह राधेय नहीं, बल्कि कुंती पुत्र (कौन्तेय) और पांडव हैं। उस सीन से पहले पंकज धीर ने डायरेक्टर रवि चोपड़ा के साथ चर्चा की। इसके बाद, पंकज धीर स्वयं नीतिश भारद्वाज के घर आए थे, जहां उन्होंने दो दिनों तक कर्ण के किरदार को लेकर गहन चर्चा की थी।

नीतिश ने बताया कि वह समझना चाहते थे कि कर्ण के मन में भावनाओं का असंतुलन या द्वंद्व कैसे होना चाहिए, जब कृष्ण उन्हें सच्चाई बताएंगे। नीतिश के अनुसार, एक अभिनेता के लिए अपने चरित्र को दूसरे महत्वपूर्ण पात्र (कृष्ण) की नजर से समझना ही पंकज धीर की महानता थी।

पंकज धीर के अभिनय शैली पर बात करते हुए नीतिश भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने कर्ण के चरित्र को बहुत मजबूती से निभाया। शूटिंग के दौरान की यादें साझा करते हुए, नीतिश भारद्वाज ने बताया कि ‘महाभारत’ की शूटिंग लगभग ढाई से तीन साल (1988 से 1991 के आसपास) चली थी। उन्होंने पंकज धीर को एक बहुत ही सीधा-सादा और एक्सट्रीम सेंस ऑफ ह्यूमर वाला व्यक्ति बताया।

शूटिंग के दौरान बेहद व्यस्त शेड्यूल होने के बावजूद, सेट पर खूब हंसी-मजाक का माहौल रहता था। नीतिश के अनुसार रवि चोपड़ा, पंकज धीर, पुनीत इस्सर, अर्जुन फिरोज खान और वे स्वयं पांच लोग थे जो अक्सर हंसी-मजाक करते रहते थे। इसमें पंकज धीर का योगदान सबसे ज्यादा था।

नीतिश भारद्वाज ने भावुक होते हुए कहा, “हमने कभी-कभी तो 36 घंटे लगातार काम किया है। इतना बिजी शेड्यूल था। इस सब के बीच में ये ठिठोली, ये सेंस ऑफ ह्यूमर… हम एक-दूसरे पर जोक्स करते थे। मित्रता का यह वातावरण ही आज याद आ रहा है।”

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