इजराइल की राजनीति में हलचल: नेतन्याहू को हटाने के लिए दो पूर्व प्रधानमंत्री एकजुट

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तेल अवीव, 27 अप्रैल 2026 । इजराइल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है, जहां मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी ताकतें तेजी से एकजुट हो रही हैं। इस बार खास बात यह है कि देश के दो पूर्व प्रधानमंत्री—यैर लैपिड और नफ्ताली बेनेट—ने मिलकर नेतन्याहू सरकार को सत्ता से हटाने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

इजराइल में दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड ने मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनका मकसद लंबे समय से सत्ता में रहे नेतन्याहू को हटाना है।

दोनों पहले भी 2021 में साथ आए थे और उन्होंने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को जोड़कर 12 साल से चली आ रही नेतन्याहू की सत्ता गिरा दी थी।

अब दोनों नेताओं ने फिर से साथ आने और एक नई पार्टी बनाने का फैसला किया है। इस पार्टी का नाम ‘टुगेदर’ रखा गया है। इसकी अगुवाई बेनेट करेंगे। वे ही पीएम उम्मीदवार भी होंगे।

इजराइल में अक्टूबर 2027 में चुनाव होने हैं लेकिन माना जा रहा है कि नेतन्याहू इसी साल अक्टूबर में संसद भंग कर चुनाव करा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह गठजोड़ इजराइल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। यैर लैपिड और नफ्ताली बेनेट पहले भी एक गठबंधन सरकार का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने कुछ समय के लिए नेतन्याहू को सत्ता से बाहर किया था। अब एक बार फिर दोनों नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत है कि विपक्ष संगठित होकर आगामी चुनावों या संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को चुनौती देने की तैयारी में है।

इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करना, न्यायिक सुधारों को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाना और सुरक्षा नीतियों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना बताया जा रहा है। हाल के महीनों में न्यायिक सुधारों को लेकर नेतन्याहू सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ा है।

वहीं, नेतन्याहू अपने मजबूत समर्थक आधार और गठबंधन सहयोगियों के दम पर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी पार्टी और सहयोगी दल इस नए विपक्षी गठजोड़ को अस्थिर और अवसरवादी करार दे रहे हैं।

मध्य पूर्व की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गठबंधन मजबूत रूप लेता है, तो इजराइल की नीतियों—खासतौर पर सुरक्षा, विदेश नीति और आंतरिक सुधारों—में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

कुल मिलाकर, इजराइल की राजनीति एक बार फिर निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां आने वाले समय में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं और भी तेज हो सकती हैं।

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