द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी में भक्ति, आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों से सराबोर

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नई दिल्ली । 28 सितम्बर 25 । संस्कृति, आस्था और मर्यादा के इस भव्य पर्व द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी में रविवार, 28 सितम्बर 2025 को डीडीए ग्राउंड, सेक्टर 10 में हजारों की संख्या में एकत्र रामभक्तों ने सीता हरण, राम विलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन और राम-सुग्रीव मैत्री जैसे भावनात्मक, शिक्षाप्रद एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का सजीव मंचन देखा।
यह भव्य आयोजन द्वारका श्री रामलीला सोसायटी (पंजी.) द्वारा किया जा रहा है, जिसके चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत अपने समर्पित सहयोगियों के साथ पूरी श्रद्धा और व्यवस्था से इस उत्सव को सफल बना रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह आयोजन न केवल भक्ति और नाट्य का संगम है, बल्कि भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है।


सातवीं रात्रि की शुरुआत उस हृदयस्पर्शी प्रसंग से हुई जब रावण छलपूर्वक जटायू के प्रतिरोध के बावजूद माता सीता का हरण करता है। मंच पर जब श्री राम और लक्ष्मण वन से लौटकर सीता जी को न पाते हैं, तब श्री राम का करुण विलाप समूचे वातावरण को भाव-विह्वल कर देता है। दर्शकों की आँखें नम हो जाती हैं, जब वे मर्यादा पुरुषोत्तम की मानवता और प्रेम की गहराई को अनुभव करते हैं।
इसके पश्चात प्रस्तुत किया गया शबरी प्रसंग, जहाँ भक्त शबरी अपनी सच्ची निष्ठा और प्रेम से प्रभु श्री राम का स्वागत करती हैं। उनके प्रेम से भरे बेरों को खाकर श्री राम ने यह सन्देश दिया कि ईश्वर को आडंबर नहीं, भाव चाहिए। इस प्रसंग ने भक्ति के सच्चे अर्थों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
सातवीं रात्रि का सबसे उत्साहजनक क्षण था राम-हनुमान मिलन का दृश्य। भक्त हनुमान का विनम्र भाव, उनकी सेवा भावना और प्रभु राम के प्रति अद्वितीय समर्पण ने सभी दर्शकों के हृदयों को छू लिया। इसके उपरांत राम-सुग्रीव मैत्री का मंचन हुआ, जहाँ धर्म और न्याय की स्थापना हेतु श्री राम और सुग्रीव का गठबंधन हुआ। इस दृश्य ने यह सन्देश दिया कि सच्चे मित्र वे हैं जो कठिन समय में साथ खड़े रहते हैं और धर्म के मार्ग पर सहयोग करते हैं।


द्वारका श्री रामलीला 2025 न केवल एक धार्मिक मंचन है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, भव्य साज-सज्जा, एलईडी स्क्रीन, आकर्षक लाइटिंग और लाइव संगीत के माध्यम से दर्शकों को ऐसा अनुभव दे रही है, जैसे वे त्रेतायुग के यथार्थ दृश्य देख रहे हों। हर पात्र की जीवंत अदायगी और संवादों की गूंज दर्शकों को रामायण के उस युग में ले जाती है।
इस पावन अवसर पर डॉ. अलका गुर्जर , भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री एवं दिल्ली की सह प्रभारी, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी विशेष रूप से उपस्थित रहे । उन्होंने इस आयोजन की भव्यता और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों के प्रचार-प्रसार की सराहना की तथा द्वारका श्री रामलीला सोसायटी के प्रयासों की प्रशंसा की।
चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत ने कहा,
“द्वारका श्री रामलीला केवल एक मंचन नहीं, बल्कि यह हमारे देश की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम है। हर वर्ष हम यही प्रयास करते हैं कि समाज के हर वर्ग तक श्री राम के आदर्श – सत्य, धर्म और मर्यादा का संदेश पहुँचे।”


उन्होंने मंचन में योगदान देने वाली पूरी टीम, कलाकारों, तकनीकी दल, और विशेष रूप से रामभक्त दर्शकों का हृदय से आभार प्रकट किया, जिनकी उपस्थिति आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति है।
द्वारका श्री रामलीला का यह आयोजन केवल भक्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विराट उत्सव बन चुका है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, जहाँ भक्ति, ज्ञान और मनोरंजन तीनों का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
कल की आठवीं रात्रि में प्रस्तुत किए जाएंगे सुग्रीव-बाली युद्ध, हनुमानजी का लंका प्रस्थान और लंका दहन जैसे अद्भुत प्रसंग। आयोजन समिति ने सभी रामभक्तों से निवेदन किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की इस महागाथा के साक्षी बनें।

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